जबलपुर

#InternationalNursesDay मरीजों की जान बचाने इन नर्सों ने गवां दी अपनी जान – पढ़े पूरी कहानी

#InternationalNursesDay मरीजों की जान बचाने इन नर्सों ने गवां दी अपनी जान - पढ़े पूरी कहानी  

3 min read
May 12, 2023
#InternationalNursesDay

जबलपुर. एक डॉक्टर और मरीज के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नर्स होती हैं। डॉक्टर जहां दवाओं के निर्धारण से बीमारियों व रोगों का निदान करता है, वहीं नर्स पर मरीज के उपचार की वास्तविक जिम्मेदारी निर्भर करती है। नर्सिंग स्टाफ के बिना, कोई भी स्वास्थ्य व चिकित्सा सुविधा एक दिन भी काम नहीं कर सकती। शहर में नर्सिंग की पढ़ाई करने वालों के लिए बहुत स्कोप है। यहां सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की संख्या अनुसार नर्सिंग स्टाफ की डिमांड लगातार बनी हुई है। हर साल हजारों नर्सिंग स्टूडेंट्स को जॉब ऑफर हो रहे हैं।

बेस्ट हेल्थ सर्विस के लिए जानी जाती हैं सिटी नर्सेस

सेवा के दौरान दांव पर लगा दिया जीवन

सिटी नर्सेस की सेवा की बात की जाए तो कोविड काल में खुद की परवाह किए बिना उन्होंने जीवन दांव पर लगा दिया था। इसमें शहर की तीन नर्सेस मीता सिंह सराठे, सीमा विनीत, सरिता मरावी का नाम शामिल हैं। इन्हें तिरंगे में लपेटकर सम्मान के साथ विदा किया गया था।

नहीं छोड़ी ड्यूटी

वैसे तो मेरा काम नर्सेस को पढ़ाना है। लेकिन अगस्त 2020 से फरवरी 2021 पीक पीरियड में मुझे कोविड स्टोर का इंचार्ज बनाया गया। इस दौरान मेरी 14 साल की बेटी और मेरे पिता समेत पूरा परिवार पॉजीटिव हो गया, लेकिन मैंने ड्यूटी नहीं छोड़ी। मैं जहां बैठती थी वहीं हमारे सामने से कोरोना पेशेंट चलकर जाते और जब उनकी डेड बॉडी निकलती तो दिल घबरा जाता था। लेकिन हमने सेवा का संकल्प ले रखा था, तो हिम्मत नहीं हारी।

डॉ. प्रतिभा सिंह ठाकुर, फैकल्टी, गर्वेमेंट नर्सिग कॉलेज

तिरंगे में लिपटी नर्स

पिछले 17 सालों की सर्विस में वैसे तो बहुत से वाक्ये हुए लेकिन कोरोना काल में एक महिला कोरोना पेशेंट और उसके बच्चे का रिश्ता जीवन भर के लिए यादगार बन गया। महिला की डेथ के बाद उसका बच्चा मुझे मां कहकर गले से लग गया, वो अब भी मिलने आता है। वहीं कोविड ड्यूटी के दौरान जब साथी नर्सेस की डेथ हुई और उन्हें तिरंगे में लपेटकर विदा किया गया,तो अपने प्रोफेशन पर गर्व महसूस हुआ। इस पल कभीनहीं भूल पाउंगी।

हर्षा सोलंकी, स्टाफ नर्स, मेडिकल

खुद शुगर बीपी की मरीज, सेवा नहीं छोड़ी
मुझे बहुत समय से शुगर और बीपी की समस्या रही है। कोरोना आने के बाद मुझे कोविड पेइंग वार्ड का इंचार्ज बना दिया गया। जबकि सरकारी गाइड लाइन के अनुसार शुगर, अस्थमा, बीपी वाले स्टाफ को कोरोना ड्यूटी से छूट दी गई थी। लेकिन मैंने इस सेवा को चुना और आज भी यहीं पदस्थ हूं। मुझे 40 साल का नर्सिंग एक्सपीरियंस है, लेकिन कोविड काल की सेवा यादगार रही है।
अंजू चटर्जी, इंचार्ज, कोविड पेइंग वार्ड

Published on:
12 May 2023 11:19 am
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