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SEO सही तो मिलेंगे खूब लाइक, google पर भी करेगा ट्रेंड

प्रोडक्ट को सर्च करने के बाद गूगल उससे रिलेटेड प्रोडेक्ट्स दिखाता है, कैच करता है आपका बिग डाटा

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जबलपुर। कई बार आपने यह नोटिस किया होगा कि किसी भी एक चीज को गूगल में सर्च करने के बाद मोबाइल या कम्प्यूटर स्क्रीन पर उस प्रोडक्ट से रिलेटेड सर्च ही नजर आती है। इस बात का अंदाजा आपने ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर किसी प्रोडक्ट की सर्च से लगाया होगा, कि थोड़े समय बाद ही जब आप किसी अन्य ब्राउजर या फिर साइट को यूज करते हैं उसी प्रोडक्ट का एडवरटिजमेंट और उसकी जानकारी बार-बार स्क्रीन पर नजर आती है। इसका सीधा कारण एसईओ गाइड टेक्निक होता है, जो कि आपके द्वारा सर्च किए गए की-बड्र्स को बिग डाटा के रूप में गूगल में सेव करना है।

क्या है एसईओ गाइड
गूगल में बिग डाटा के सेव होने की कहानी एसईओ गाइड टेक्निक से जुड़ी हुई है। एसईओ गाइड यानी की सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन। यह एक तरह का गूगल का डिफॉल्ट की-बड्र्स फिल्टर होता है, जो कि लोगों द्वारा सर्च की हुई जानकारी को खुद में दर्ज करता है। वह आपकी सुविधा और सर्च किए हुए प्रोडक्ट की जानकारी लेने के बाद सोशल मीडिया या फिर अन्य साइट्स में इससे जुड़ी इन्फॉर्मेशन को अपने आप मोबाइल पर दिखाने लगता है।

ऑटो स्क्रिप्टिंग की कहानी
सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन गूगल में एक तरह से ऑटो स्क्रिप्टिंग का काम करता है। आपके द्वारा दर्ज की गई की-बड्र्स को फिल्टर करने के बाद उससे सम्बंधित रिजल्ट दिखाता है। इसे समझने के लिए आपको देखना होगा कि जब कभी आप गूगल लेटेस्ट फोन के बारे में सर्च करते हैं तो गूगल वह की-बड्र्स और लिंक को सेव कर लेता है। क्योंकि ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स गूगल से कनेक्ट होती हैं तो यह आपके द्वारा सर्च किया हुआ हर तरह का डाटा सेव करके अगली साइट्स में भी दिखाता है। इस तरह से आपकी हर सर्च गूगल के बिग डाटा लाइब्रेरी में ऑटो सेव हो जाती हैं।

वाई-फाई पर ट्रांजेक्शन यानी खतरा
आईटी एक्सपर्ट और साइबर सिक्योरिटी के जानकार कैप्टन शैलेन्द्र शुक्ला के अनुसार वाई-फाई में ट्रांजक्शन और नेट बैंकिंग करने का सबसे बड़ा खतरा बढ़ जाता है। एेसे में नेट बैंकिंग के लिए पसर्नल मोबाइल डाटा ही सेफ होता है। क्योंकि जब भी वाई-फाई यूज करते हैं इसमें सिक्योरिटी के तौर पर एचटीपीपीएस की बजाय वाई-फाई यूज करने वाली साइट्स पर एचटीपीपी ओपन होता है। एचटीपीपीएस में एस सिक्योरिटी से जुड़ा होता है, जिससे ट्रांजक्शन सेफ रहता है, लेकिन यह सिक्योरिटी वाई-फाई यूज करने के दौरान नहीं मिलती।

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