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Osho का इस शहर से था गहरा लगाव, लोगों ने चलाया यह अभियान

ओशो के नाम पर डुमना एयरपोर्ट का नामकरण करने की सीएम से की मांग

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Osho jayanti: acharya rajnish deeply attached to Jabalpur

Osho jayanti: acharya rajnish deeply attached to Jabalpur

जबलपुर. प्रसिद्ध दार्शनिक व धर्म गुरू आचार्य रजनीश ओशो का जबलपुर से जो जुड़ाव था उसे सारी दुनिया जानती है। उनके जीवन का एक अहम हिस्सा संस्कारधानी में ही बीता था। यहीं उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति भी हुई थी ओर इसका जिक्र भी कई बार किया जा चुका है। संस्कारधानी वासी अब आचार्य रजनीश के इस जुड़ाव को हमेशा के लिए बरकरार रखने के लिए एक अभियान चला रहे हैं। डुमना एयरपोर्ट का नाम दार्शनिक व धर्म गुरू आचार्य रजनीश ओशो के नाम पर करने के लिए यह पहल की गई है।
सीएम से भी करेंगे मांग
इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर उनसे भी यह मांग की जाएगी। आचार्य रजनीश की जयंती पर शहर का एक प्रतिनिधि मंडल उनके समक्ष मांग रखेगा। प्रतिनिधि मंडल की ओर से स्वामी आनंद विपुल, अनिल तिवारी ये मांग रखेंगे। प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि ओशो ने अपने वक्तव्य के जरिए जबलपुर की खूबसूरती, नर्मदा व भेड़ाघाट के सौंदर्य का वर्णन किया गया। उन्होंने अपनी किताब बियांड साइकॉजिली में भेड़ाघाट का उल्लेख करते हुए लिखा कि चांदनी रात में भेड़ाघाट का संगमरमरीय सौंदर्य(नौकायन) हजारों ताजमहल से भी ज्यादा खूबसूरत है। उन्हें जबलपुर व भेड़ाघाट से सदैव गहरा लगाव रहा है। उन्होंने भंवरताल में आत्मज्ञान प्राप्त किया और फिर दुनियाभर में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। एेसे महापुरुष के नाम पर एयरपोर्ट का नामकरण करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
रानी दुर्गावती का भी नाम उठा
इधर पृथ्वीराज चौहान फाउंडेशन ने डुमना एयरपोर्ट का नामकरण साहस और बलिदान की देवी रानी दुर्गावती करने की मांग की है। फाउंडेशन द्वारा इसे लेकर अभियान चलाया जा रहा है। फाउंडेशन ने पिछले दिनों संस्कारधानी चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सर्वेश्वर चमन श्रीवास्तव से समर्थन मांगा था। चेम्बर ने समर्थन करते हुए एयरपोर्ट का नामकरण रानी दुर्गावती करने की बात दोहराई है। फाउंडेशन के दीपक सिंह राजपूत ने बताया कि उक्त महाभियान को शहर की सभी राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक, महिला, विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिल रहा है। जबलपुर की पहचान गोंडवाना राज्य के तौर पर इतिहास में दर्ज है। फाउंडेशन की अध्यक्ष कमला चौहान, शोभना रैकवार, राजपात सिंह मथारू, अनुज सिंह ठाकुर, आशा सिंह, माया विश्वकर्मा, जीएस राजपूत ने अभियान का समर्थन किया है।