
gajrath mahotsav
जबलपुर। सुसज्जित अयोध्या नगरी और इसके चारों ओर लिखे आचार्य विद्यासागर के प्रभावी संदेश के बीच सोमवार को दूसरे दिन गर्भ कल्याणक पूर्व रूप के विधान हुए तो भक्ति का अपूर्व दृश्य देखने को मिला। सजीव चित्रण में मु_ी भर चावल चढ़ाकर कहता है इंसान, मुझको मिल जाए भगवान... जैसे धुन बजी तो प्रमुख पात्र और 1008 जोड़े इंद्र इंद्राणियां नृत्य की मुद्रा में आ गए। ऐसा दृश्य बना जैसे कि धरती पर इंद्रासन जीवंत हो गया हो।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय भैया ने प्रतिष्ठा विधि के अनुसार इन्द्र प्रतिष्ठा की। दोपहर में यागमंडल विधान हुआ, जिसमें पंच परमेष्टि, 24 तीर्थंकर, भूत-भविष्य-वर्तमान के भगवानों का पूजन-अर्चन हुआ। मुनि सुव्रतनाथ भगवान जिनालय गुरुकुल में निर्देशाचार्य ब्रह्मचारी जिनेश भैया, महेश भैया, नरेश भैया व रविन्द्र भैया ने यागमंडल विधान सम्पन्न कराया। मंत्रजाप ब्रह्मचारी त्रिलोक भैया, अन्नू भैया, पंकज भैया व चक्रेश भैया ने किया। मंगलवार को गर्भकल्याण उत्तर रूप की क्रियाएं होंगी।
विधान के अंतर्गत पात्र शुद्धि, सकलीकरण, नांदी विधान, इन्द्रप्रतिष्ठा, नित्यमह अभिषेक, शांतिधारा पूजन, आचार्यश्री का पूजन व मुनि श्री के प्रवचन हुए। यांगमंडल विधान, संगीतमयी महाआरती, विद्वानों के प्रवचन, सौधर्म इन्द्र सभा, आसन कम्पायमान, नगरी की रचना, माता-पिता की स्थापना, अष्ट देवियों द्वारा माता की परिचर्या, सोलह स्वप्न दर्शन के साथ गर्भ कल्याणक की आंतरिक संस्कार क्रियाएं सम्पन्न हुई। सुधर्मा सभा में इन्द्रों के धर्म चर्चा में इंद्रासन कम्पायमान हुआ। इंद्र ने बताया, महाराजा नाभिराय के घर-आंगन में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋ षभनाथ भगवान माता मरुदेवी के गर्भ में आने वाले हैं। कुबेर-इन्द्र ने अयोध्या की रचना की, 56 कुमारी व अष्टकुमारी देवियों ने माता मरुदेवी की सेवा की।
मुनिश्री योगसागर ने केशलोंच कर तप किया
जिनबिम्ब प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को ज्ञान वैराग्य के अनुपम संगम मुनिश्री योगसागर महाराज ने केशलोंच कर उपवास तप किया। केशलोंच के दिन मुनिश्री लगभग 48 घंटे के बाद आहार अन्न जल ग्रहण करेंगे, वे निरंतर तत्व-चिंतन, आत्मा के स्वरूप का ध्यान आदि आत्मासृत वृत्तियों में समय व्यतीत करेंगे।
कीर्ति स्तम्भ का लोकार्पण आज
श्री पाŸवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पिसनहारी मढिय़ा में मंगलवार दोपहर 12 बजे मुनि योगसागर ससंघ के सान्निध्य में कीर्ति स्तम्भ का लोकार्पण किया जाएगा। प्रचार मंत्री संजय चौधरी ने बताया, आचार्य विद्या सागर के संयम स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत धौलपुरी पत्थरों से निर्मित 31 फुट ऊंची और 21 फुट चौड़े कीर्ति स्तम्भ का निर्माण किया गया है।
मुनि सुव्रत नाथ की आराधना से दूर होती है शनि ग्रह की पीड़ा
श्री वर्णी गुरुकुल परिसर में धौलपुरी पत्थरों से निर्मित भव्य मंदिर में जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर मुनि सुव्रत नाथ की प्रतिमा प्रतिष्ठित होगी। मंदिर में स्थापित होने वाली मुनि सुव्रत नाथ की प्रतिमा संस्कारधानी में सबसे ऊंची है। श्याम वर्ण की नौ फुट ऊंची प्रतिमा मंदिर में विराजित की गई है। जैन दर्शन के अनुसार मुनि सुव्रत नाथ की आराधना से शनि ग्रह की पीड़ा दूर होती है। गजरथ महोत्सव में 150 परिवारों के लोग धातुओं से निर्मित विभिन्न तीर्थंकरों की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा करवा रहे हैं। पिसनहारी मढिय़ा तीर्थ में इन प्रतिमाओं पर प्रशस्ति लिखी जा रही है। अयोध्या नगरी में वेदी पर विराजित कर प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया जाएगा और जिनालयों में पूजा की जाएगी। ब्रह्मचारी त्रिलोक जैन ने बताया, तीर्थंकर भगवतों की आराधना से अशुभ, अमंगल कर्मों की विराधना होती है। जैन समाज के प्रवक्ता अमित पड़रिया ने बताया, जैन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोग अपनी राशि के अनुसार तीर्थंकर भगवंतों की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा करा रहे हैं। लघु विद्यानुवाद के अनुसार मुनि सुव्रत नाथ की पूजा से शनि ग्रह की पीड़ा दूर होती है।
Published on:
19 Feb 2019 07:30 am
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