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तीर्थंकर बालक के साथ सफेद हाथी पर हुए विराजमान इंद्र, भक्तों ने किया अभिषेक

पंचकल्याण गजरथ महोत्सव: जन्म कल्याणक के अभिषेक के बाद भगवान का शृंगार

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gajrath mahotsav

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जबलपुर। युग प्रवर्तक, जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक में बुधवार को अयोध्या नगरी से पांडुक शिला तक भक्तिमय महौल था। ऐरावत स्वरूप सफेद हाथी पर तीर्थंकर बालक के साथ विराजमान सौधर्म इंद्र के साथ इंद्र इंद्राणियां और श्रावकों ने शोभायात्रा निकाली तो सबके चेहरों पर भक्ति और खुशी के भाव आ गए। श्री वर्णी गुरुकुल परिसर स्थित निर्मित पांडुक शिला पर इंद्र इंद्राणियों ने रत्न जडि़त 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक किया गया। इस विशेष अवसर पर भक्तों ने भगवान का जयघोष किया और बधाई गीत बजे तो भाव विभोर लोग थिरकने लगे।
गजरथ स्थल पर सृजित अयोध्या नगरी में जैसे ही प्रभु आदिनाथ के जन्म की घोषणा ब्रह्मचारी विनय भैया, जिनेश भैया विधानाचार्य ब्रह्मचारी त्रिलोक भैया ने की, वैसे ही जन्म हुआ नर नाथ का, धरती हुई सनाथ, सुर नर मुनिगण बोलते, जय-जय आदिनाथ... की धून पर लोग नृत्य करने लगे। सौधर्म इंद्र और शची इंद्राणी के बीच तीर्थंकर बालक के जन्म का संवाद रोचक रहा। जिन बालक के पालना और बाल क्रीड़ा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
सपने साकार होते हैं, सत्य के आकार होते हैं
मुनि योगसागर सहित अन्य मुनिश्री ने प्रवचनों में कहा कि कौन कहता है सपने साकार नहीं होते होते हैं, सत्य के आकार नहीं होते हैं। ऐसा नहीं है क्योंकि माता मरुदेवी के सपने साकार हुए हैं, कर्मयुग के प्रारंभ में आदिनाथ भारत-भू पर अवतरित हुए हैं। भारतीय वसुंधरा रत्गर्भा के साथ-साथ साधुगर्भा भी है। धरती की कोख से जहां रत्न निकलते हैं, वहीं माता मरु देवी की कोख से आदिनाथ, त्रिशला की कोख से भगवान महावीर और मां कौशल्या की कोख से प्रभु श्रीराम से जगमग चेतन रत्न निकलते हैं। हमारा सौभाग्य इसी परम्परा में संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर माता श्रीमंती की पावन कोख एवं पिता मल्लपा के घर आंगन को धर्म धन्य कर भारत-भू पर आचार्य भगवान ज्ञानसागरजी से जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त कर रत्नात्रय का दिव्य-प्रकाश प्रदान कर रहे हैं।
गजरथ फेरी 23 को, बंद रहेंगे जैन प्रतिष्ठान
गजरथ महोत्सव के समापन दिवस 23 फरवरी को शहर के सभी जैन प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। यह जानकारी मुनि संघ सेवा समिति, गढ़ा जबलपुर गजरथ प्रभाग के संयोजक सिंघई इन्द्रकुमार जैन ने दी। उन्होंने बताया कि इस दिन सकल जैन धर्मावलंबी व्यापार-व्यवसाय से दूर रहकर पूर्ण मनोयोग से धर्म की गंगा बहाएंगे। वे मोक्ष कल्याणक के साथ दोपहर में ऐरावत गज पर सवार होकर निकले मुनि सुव्रतनाथ भगवान के गजरथ-पथ की सात परिक्रमाओं के स्वर्गिक-दृश्य का दर्शन करेंगे। ब्रह्मचारिणी बबली दीदी, ब्रह्मचारिणी कल्पना दीदी, अशोक जैन, आनंद सिंघई, महामंत्री कमल दानी, अमित पड़रिया, ज्ञानचंद लारेक्स, सुरेंद्र जैन पहलवान, इंदू जैन, रज्जू जैन, गीतेश जैन, रौनक जैन, नितिन बेंटिया, मुन्ना गांधी, ऋषाभ जैन, आलोक जैन, मनीष जैन, सत्येन्द्र जैन, आशीष जैन, मनोज जैन सहित आदि मौजूद थे।