
Parents day : बच्चों की उलझन समझें पैरेंट्स, बढ़ाएं इमोशनल इंटेलीजेंस
बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में पैरेंट्स का रोल अहम है। यदि इस बड़ी जिम्मेदारी में कुछ कमी रह जाए तो इसका नतीजा नकारात्मक रूप में सामने आता है। वर्तमान में इस तरह की घटनाएं संस्कारधानी में लगातार सामने आ रही हैं। फिर चाहे वह छेड़छाड़ की घटनाएं हो या फिर लूटपाट की।
जबलपुर. कम उम्र के युवा इनमें लिप्त नजर आ रहे हैं। मनोवैज्ञानिक इसे सीधे तौर पैरेंट्स को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि यदि टीनएज, यंगएज की शुरुआत में कोई अपराध करता है तो इसके लिए कहीं ना कहीं पैरेंटिंग जिम्मेदार है। आज पैरेंट्स डे के मौके पर हर पैरेंट को एक संकल्प लेना चाहिए कि वह अपने बच्चे को ना केवल अच्छी परवरिश देंगे, बल्कि संस्कार, नैतिक मूल्य का भी पाठ उन्हें सिखाएंगे। उन्हें वक्त देंगे, ताकि वह गलत रास्तों में ना जाए। पुरानी पैरेंटिंग अपनानी चाहिए।
नाना-नानी, दादा दादी का साथ नहीं
न्यूक्लियर फैमिली का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस कारण बच्चों को ग्रैंड पैरेंट्स के साथ नॉलेज शेयरिंग का वक्त नहीं मिलता है। वह केवल अपने दोस्तों, अपने स्कूल और आसपास के कल्चर को अडॉप्ट करते हैं। ज्यादातर ज्ञान की बातें भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीख रहे हैं। यही वजह है कि बच्चे गलत संगत की ओर बढ़ रहे हैं।
'तूफान की अवस्था' में पैरेंट्स की अधिक जरूरत
17 से 22 की उम्र में हारमोनल इमोशनल डवलपमेंट होता है। मनोविज्ञान की भाषा में इसे तूफान की अवस्था कहा जाता है। यह वह पीरियड होता है, जब पैरेंट्स को सबसे ज्यादा टाइम बच्चों को दिया जाना चाहिए और यदि इस वक्त पर वह बच्चों को अधिक समय नहीं देते हैं तो उनका ध्यान डाइवर्ट होने लगता है।
जबलपुर में हुए कुछ मामले
केस 1
इसी माह एक कपड़ा व्यापारी के भतीजे ने खुद के घर के पैसों को लेकर लूट की साजिश रची। सट्टे में पैसे हार जाने के कारण पैसों की जरूरत थी। इस तरह बैंक में जमा की जाने वाली राशि को लूट की घटना का नाटकीय रूप दिया। लार्डगंज थाने में मामला दर्ज हुआ।
केस 2
एक दिन पहले ही आठवीं कक्षा की कुछ बच्चे एक व्यापारी से रंगदारी करने पहुंचे। व्यापारी के बेटे को धमकाकर 12 हजार रुपए की राशि लेने पहुंचे। व्यापारी जब दुकान आया तो इसकी सूचना पुलिस को दी।
केस 3
चार दिन पहले अधारताल थाना के अंतर्गत एक युवक ने 15वर्षीय किशोरी को दुष्कर्म के इरादे से बंधक बनाया था। लड़की चंगुल छुड़ाकर भाग निकली और घटना की जानकारी घर और पुलिस में दी।
मां अपने बेटों को भी सिखाएं
समाज सेविका अंजुलता गुप्ता कहती हैं कि आए दिन छेड़छाड़, रेप जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। सुरक्षा के लिए हर मां और पिता अपनी बेटी को समझाते हैं कि ठीक तरह के कपड़े पहने या देर शाम घर से बाहर मत निकले, लेकिन समस्या का समाधान केवल इन चीजों से नहीं है। पैरेंट्स को चाहिए कि वह अपने बेटों को भी अच्छे संस्कार दे। यह बताएं कि उनकी सीमाएं क्या हैं। हर महिला एवं लड़की का सम्मान करे।
खत्म हो रहा इमोशनल इंटेलिजेंस
मनोवैज्ञानिक रत्ना जौहरी बताती हैं कि इमोशनल इंटेलिजेंस की कमी के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है। जब तक पैरेंट्स का अपने बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव नहीं होगा, बच्चे अपने मन की बातें उनसे साझा नहीं करेंगे। आजकल पैरेंट्स वर्किंग हैं। ऐसे में वे अपने बच्चों को पैसे, सुख-सुविधाएं संबंधी सभी चीजें मुहैया करवा रहे है, लेकिन भावनात्मक रूप से जुड़ाव को लेकर पैरेंट्स के पास टाइम नहीं है।
पैरेंट्स अपनाएं चार तरीके
- बच्चों को समय दें। आप कितने भी व्यस्त हैं, लेकिन रोजाना बच्चों से बात करें, शेयरिंग करें।
- भावनाओं को समझें। यदि वह किसी परेशानी में है, उनकी परेशानियों को कम करें। बच्चों को उलझनों से निकालें।
- सोशल मीडिया से दूरी बनाने के लिए घर के बड़ों के साथ घुलने-मिलने के लिए कहें। ग्रैंड पैरेंट्स, अन्य रिश्तेदारों के साथ इंटरेक्शन करवाएं।
- भौतिकवादी वातावरण और सामान्य जीवन के बीच तारतम्य लाएं। उन्हें लग्जरी, स्टेटस सिंबल का ज्यादा ध्यान होता है।
Published on:
22 Jul 2018 06:06 am
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