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पुणे में नहीं, यहां बन रहा था ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर

गाडरवारा के गोटीटोरिया मेें ओशो सेंटर के लिए किए थे प्रयास, रेलवे स्टेशन का नाम रजनीशपुरम करने की भी हुई थी कोशिश

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neeraj mishra

Dec 31, 2016

osho

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जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुणे को आचार्य रजनीश के आश्रम के लिए भी जाना जाता है। जिस ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसोर्ट ने पुणे को यह अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है वह पहले मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में उनकी मातृभूमि में बननेवाला था। आचार्य रजनीश की रजामंदी से इसके लिए उनके कुछ सहयोगियों ने प्रयास किए थे।

नरेंद्र बोधिसत्व ने की थी पहल
स्वामी नरेंद्र बोधिसत्व आचार्य रजनीश के लंगोटिया यार थे। गाडरवारा में एक-दूसरे के घर के आसपास रहनेवाले नरेंद्र और आचार्य रजनीश का बचपन से शुरु हुआ साथ जीवनपर्यत बना रहा। स्वामी नरेंद्र के भतीजे राजीव जैन के मुताबिक गाडरवारा में पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने जबलपुर में भी साथ ही पढ़ाई की। यहां से रजनीश मुंबई चले गए और नरेंद्र शिक्षक बन गए। बाद में आचार्य रजनीश ने उन्हें भी मुंबई बुला लिया। मुंबई का मौसम आचार्य रजनीश को रास नहीं आ रहा था। वे प्राकृतिक वातावरण में आश्रम बनाना चाहते थे। तब उनकी रजामंदी पर स्वामी नरेंद्र बोधिसत्व ने गाडरवारा के गोटीटोरिया के घने जंगलों में आश्रम बनाने की पहल शुरु की। गाडरवारा के ही देवेंद्र पंडा बताते हैं कि इसके लिए वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों को आवेदन दिए गए पर बात बनी नहीं। अंतत: पुणे में आश्रम का निर्माण कराया गया।

तो गाडरवारा होता विश्वविख्यात
राजीव जैन बताते हैं कि उनके चाचा अक्सर इस बात का उल्लेख किया करते थे। यदि स्वामी बोधिसत्व की यह पहल रंग ले आती तो न केवल आचार्य रजनीश का सपना साकार हो जाता बल्कि गाडरवारा को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल जाती। वैसे इस कमी को पूरा करने के अनेक प्रयास बाद में भी किए गए। शहर के रेलवे स्टेशन का नाम रजनीशपुरम करने के लिए भी खूब कोशिश की गई।