
fireworks, on Deepawali (File photo)
जबलपुर. विशेषज्ञ पहले ही इस बात का अंदेशा जता चुके हैं कि अगर इस बार दीपावली पर पहले की तरह आतिशबाजी हुई तो न केवल वायु प्रदूषण बढ़ेगा बल्कि इसके साथ-साथ कोरोना वायरस का संक्रमण भी तेज हो सकता है। चिकित्सकों का मानना है कि पटाखों से निकलने वाले घातक काले धुएं से पहले ही सांस की बीमारी से ग्रस्त लोगों की परेशानी बढ़ती रही है। ऐसे में अब अगर कोरोना काल में आतिशबाजी हुई तो वह उन लोगों के लिए भी घातक साबित हो सकती है जो कोरोना का मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। वैसे भी कोरोना एक्सपर्ट पहले ही सचेत कर चुके हैं कि नवंबर महीने में कोरोना संक्रमण तेज हो सकता है। ऐसे में जबलपुर के लोगों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में एक जनहित याचिका दायर कर पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की मांग की है।
एनजीटी में याचिका दायर करने वाले नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच जबलपुर के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे का कहना है कि मध्य प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को स्टेट प्लान बनाकर कार्य करना चाहिए। आपदा नियंत्रण कानून-2005 के तहत आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास पटाखों पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने का अधिकार है। बावजूद इसके इस दिशा में गंभीरता नहीं बरती जा रही। ऐसे में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच को जनहित में आगे आना पड़ा है।
डॉ नाजपांडे कहते हैं कि पिछले साल तक कोरोना जैसी महामारी का खतरा नहीं था, लेकिन इस बार पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण से कोरोना संक्रमण के बढ़ने का खतरा है। ऐसे में हमें संयम बरतते हुए पूरी धार्मिक विधि-विधान से ही दीपावली का पर्व मनाना चाहिए। इसी में समझदारी है।
वो कहते हैं कि उत्सव मनाने की भावना सर्वजनहिताय की भावना से जुड़ी है न कि जनमानस को प्रदूषण से दुष्प्रभावित करने से। दीपावली की रात पिछले सालों की तरह अगर पटाखे जलाए गए तो वायुमंडल में होने वाला प्रदूषण का हमला कोरोना संक्रमण से उबर चुके मरीजों को वापस कोरोना पॉजिटिव बना सकता है। वहीं नए कोरोना पॉजिटिव भी बढ़ सकते हैं।
Published on:
20 Oct 2020 05:09 pm
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