15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Tourism industry – पीपीपी मॉडल पर संवरेंगे नए पर्यटन केन्द्र

ईको, ग्रामीण, नर्मदा घाटी स्थित टापू और जलाशयों जैसे क्षेत्रों में निवेश की बढ़ी संभावन

2 min read
Google source verification

image

reetesh pyasi

Oct 17, 2016

tourism,mp travell and tourism,MP tourism cabinet

tourism,mp travell and tourism,MP tourism cabinet meeting,new tourism policy2016

जबलपुर। पर्यटन की दृष्टि से सम्भावनाशील जिलों में शुमार जबलपुर के बरगी, डुमना, ग्वारीघाट, भेड़ाघाट को नई पहचान मिल सकती है। ये सम्भव होगा प्रदेश सरकार की नई पर्यटन नीति से। प्रदेश सरकार ने अब पीपीपी मॉडल पर पर्यटन केंद्रों के विकास का निर्णय लिया है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति धार्मिक स्थलों के विकास, ईको टूरिज्म, नर्मदा घाटी स्थित टापू के विकास और जलाशयों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास करने के साथ उसे पयर्टन केंद्र के रूप में विकसित कर सकता है।
नई नीति का सबसे अधिक लाभ जबलपुर को मिल सकता है। जिले स्तर पर जिला पर्यटन संवद्र्धन परिषद (डीटीपीसी) का गठन किया जाएगा। इसमें अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों को रखा जाएगा। परिषद निवेशकों को आकर्षित करने का काम करेगी। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को नोडल एजेंसी बनाया गया है। लाइसेंस से लेकर परियोजनाओं की स्थापना आदि सम्बंधी औपचारिकता महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की ओर से पूरी होगी। प्रदेश सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है और निवेशकों को उसी तर्ज पर छूट भी मिलेगी।

इन क्षेत्रों का हो सकता है विकास
ग्वारीघाट व तिलवारा- धार्मिक दृष्टि से दोनों स्थलों का विकास हो सकता है। इसे धार्मिक क्षेत्र भी घोषित किया जा चुका है।
बरगी डैम स्थित टापुओं का विकास- बरगी डैम में कई टापू हैं। आस-पास भी कई एेसे स्थल हैं, सालभर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। यहां एडवेंचर और वॉटर स्पोट्र्स के कई रोमांचक गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं।
तालाबों का विकास- शहर में 36 के लगभग तालाब बचे हैं। इसमें दो दर्जन भर तालाब एेसे हैं जिसे पयर्टन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है।
ईको टूरिज्म- जिले में खंदारी, डुमना व बरगी क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सकता है
रोप-वे- मदन महल की पहाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य के बल पर पर्यटकों में खास जगह बना सकती है। रोप-वे से पहाड़ी व मदन महल किले के दर्शन जैसी कई योजनाएं बनीं, लेकिन प्रशासन ने पैसों के अभाव में कदम वापस कर लिए।

ये भी पढ़ें

image