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#RadiologyDay जटिल बीमारियों में रेडियोलॉजी बनी मददगार

#RadiologyDay जटिल बीमारियों में रेडियोलॉजी बनी मददगार  

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Radiology

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जबलपुर . जटिलतम बीमारियों को शुरुआती स्टेज में पहचानने में अत्याधुनिक उपकरण मददगार बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल की लैब से लेकर निजी लैब में अत्याधुनिक मशीनों से ब्लड, यूरिन की ज्यादा डिटेल में जांच रिपोर्ट मिल रही है। यह विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए भी लाभदायक है। पहले इन्हीं जांच के लिए जबलपुर और आसपास के मरीजों को महानगरों के चक्कर काटने पड़ते थे।

छात्रों का बना पसंदीदा विषय
आधुनिक मेडिकल साइंस में रोगों की जांच में मशीनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए विशेषज्ञों की भी आवश्यकता होती है। रेडियोलॉजी की भूमिका भी बढ़ गई है। इस कारण मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी में डिप्लोमा, बैचलर डिग्री से लेकर पीजी व स्पेशलाइजेशन कोर्स के लिए युवाओं में डिमांड बढ़ी है।

एमआरआई की 2 टेस्ला तक की मशीन

मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन में 15 से 90 मिनट तक लगते हैं। ये इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर के कौन से कितने बड़े हिस्से को स्कैन किया जाना है और कितनी तस्वीरें ली जानी हैं। मशीन जितनी ज्यादा टेस्ला वाली होती है उसका उसका मैगनेटिक फील्ड उतना ज्यादा होता है। कैंसर, मिर्गी, स्पोर्ट्स इंजरी, लीवर, किडनी, पेट संबंधी और न्यूरो संबंधी बीमारियों की डायग्नोसिस में इससे मदद मिल रही है।

सोनोग्राफी में अत्याधुनिक तकनीक

विशेषज्ञों के अनुसार हाई एंड कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड मशीन में अत्याधुनिक सुविधा है। मरीजों और खासकर गर्भवती महिलाओं को थ्री डी और फोर डी और फ्यूजन इमेजिंग की सुविधा मिलती है। रोगियों की मांसपेशियों के अल्ट्रासाउंड भी हो सकते हैं। इसमें थ्री डी और फोर डी इमेजिन के साथ फ्यूजन (विलय) इमेजिंग सुविधा है। थ्री डी इमेज में पेट के भीतर पूरा शिशु स्थिर (फिक्स) स्थिति में नजर आता है। जबकि टू डॉयमेंशनल इमेज में यह लेयर में नजर आता है। फोर डी इमेज में अगर पेट के भीतर शिशु घूम रहा है तो वह भी नजर आता है।

बीमारियों की जांच के लिए शहर में अत्याधुनिक उपकरणों की संख्या बढ़ी है। एडवांस लेवल की मशीनों से बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ने से लेकर इलाज में मदद मिल रही है।
- डॉ. संजय मिश्रा, सीएमएचओ