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rakhi purnima kab hai: राखी पूर्णिमा पर नहीं रहेगा ग्रहों का साया, इतने घंटे होगा शुभ मुहूर्त

राखी पूर्णिमा पर नहीं रहेगा ग्रहों का साया इतने घंटे होगा शुभ मुहूर्त

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rakhi purnima kab hai

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जबलपुर। सनातन हिंदू धर्म के अनुसार प्रमुख त्यौहारों में राखी भी एक बहुत बड़ा त्यौहार माना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को राखी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन रक्षाबंधन के नाम से त्यौहार भी मनाया जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त से लग जाएगी। लेकिन राखी पूर्णिमा 26 अगस्त के सूर्य उदय के समय से शुरू होगी। हम पिछले बार की बात करें तो ग्रहण और सूतक के कारण रक्षाबंधन का मुहूर्त 2 घंटे से कुछ ज्यादा ही रहा है। किंतु इस बार भाई बहन को करीब 11 घंटे का समय मिलेगा।

राखी के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी और उनसे रक्षा का वचन लेंगी। वहीँ भाई भी सामर्थ्य अनुसार उन्हें अपना उपहार देकर यह वचन पूर्ण करेंगे। ज्योतिषाचार्य सचिन देव महाराज के अनुसार रक्षाबंधन राखी को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं।

भविष्य पुराण के अनुसार ऐसा माना गया है की रक्षाबंधन याने राखी का त्यौहार इसलिए भी मनाया जाता है कि देवताओं और व्यक्तियों के बीच युद्ध में बलि नाम के अशोक ने इंद्र को हरा दिया था। उसने अमरावती पर अपना अधिकार जमा लिया। तभी इंद्र की पत्नी सची मदद का आग्रह लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने सचि को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया। भगवान विष्णु ने सचि से कहा कि इसे इंद्र कलाई में बांध दो। उन्होंने इंद्र की कलाई पर बांध दिया और सुरक्षा व सफलता की कामना की। इसके बाद भगवान इंद्र ने बलि को हराकर अमरावती पर अपना अधिकार पुनः प्राप्त कर लिया।

इसके अलावा अन्य देवी देवताओं और राजघरानों की कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। किंतु कहानियां कुछ भी हो यह पवित्र रिश्ते का त्यौहार है। जिसे देश ही नहीं दुनिया भर में मनाया जाता है। राखी पूर्णिमा पर भोर होते ही उठे और स्नान ध्यान के बाद भगवान का पूजन करें। यथाशक्ति अनुसार असहाय व गरीबों को दान करें इससे भाई की क्लास भी दूर होते हैं और बहन को भी सुख शांति की प्राप्ति होती है।