रामलीला मंचन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र से लोगों को प्रेरणा देना एवं सामाजिक व धार्मिक कुरीतियों में सुधार लाना था। इसके बाद नत्थू महाराज ने बागडोर संभाली, जिसमें मिलौनीगंज क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यापारियों ने तन, मन और धन से सहयोग दिया। इनमें मोथाजी मुनीम, साव गोपालदास, पुत्ती पहारिया, चुनकाई महाराज, डमरूलाल पाठक, मठोलेलाल रिछारिया आदि इसके सूत्रधार बने।