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#WaterConservation रानी दुर्गावती के काल की दो बावड़ियों में ‘जल मंदिरों’ की स्थापना – देखें वीडियो

#WaterConservation रानी दुर्गावती के काल की दो बावड़ियों में ‘जल मंदिरों’ की स्थापना - देखें वीडियो  

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Rani Durgavati stepwells

Rani Durgavati stepwells

जबलपुर . जल संरक्षण के क्षेत्र में झाबुआ में कार्य करता हूं। लोग दूर-दूर से उसे देखने आते हैं। अब मैं लोगों से कहूंगा कि जल संरक्षण के कार्य को देखना हो तो जबलपुर जरूर जाइए। जल के महत्व को समझते हुए ऐतिहासिक और पुरातन बावड़ी जो गंदगी और कीचड़ से भरी रहती थी, उनके जीर्णोद्वार का बीड़ा उठाकर उन्हें जल मंदिर के रूप के स्थापित करने यहां किया गया कार्य अनुकरणीय है। यह बात पद्मश्री डॉ. महेश शर्मा ने गढ़ा स्थित राधाकृष्ण बावड़ी के लोकार्पण पर कही। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के साथ गढ़ा व उजार पुरवा बावड़ी के जीर्णोद्वार कायाकल्प कार्य का लोकार्पण किया।

जल संकट को देखते हुए किए प्रयास

मंत्री सिंह ने कहा कि जब वे सांसद बने और जल के पुरातन स्त्रोतों को समाप्त होते देखा तब मन में आया कि जल संरक्षण की दिशा में कार्य करना चाहिए। इस दिशा में काम शुरू किए। जल रक्षा यात्रा, हर वर्ष जल संरक्षण के लिए जन जागरण, तालाबों की सफाई, बरेला के पास गोमुख में ग्रेवेडियन बांध का निर्माण, संग्राम सागर के संरक्षण के काम किए। इसी दौरान ध्यान में आया कि नगर में रानी दुर्गावती के काल की ऐतिहासिक बावड़ियां हैं, जिनमें गढ़ा क्षेत्र स्थित राधाकृष्ण बावड़ी और बल्देवबाग स्थित उजार पुरवा बावड़ी को देखा तो लगा इनका पुनरुद्धार होना चाहिए। इसके लिए स्थानीयजन व भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ श्रमदान किया। कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, अभिलाष पांडे, संतोष बरकड़े, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रभात साहू, ग्रामीण अध्यक्ष रानू तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष रिकूृ विज, कमलेश अग्रवाल शामिल थे।

अनुकरणीय कार्य

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शर्मा ने कहा हमने सुना और पढ़ा है त्रेता युग के समय पत्थर बनी मां अहिल्या को स्पर्श करके भगवान राम ने उनका उद्धार कर दिया था। लेकिन जबलपुर में कीचड़ से भरी दो ऐतिहासिक बावड़ियों के जीर्णोंद्वार के साथ उन्हें मंदिर बनते आंखों से देख रहे हैं। इस श्रम रूपी पारस के स्पर्श के लिए देशभर के जलस्रोत और बावड़ी तरस रही हैं। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने नगर में आगे बढ़कर ये काम किया है। जल संरक्षण की दिशा में जो सार्थक प्रयास किए हैं और आने वाली पीढ़ियों को जल की समृद्ध विरासत मिले इसके लिए किए गए कार्य अनुकरणीय हैं।