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आठ साल में नहीं खुल पाई वस्त्र बनाने वाली इकाइयां

रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर: कलेक्टर ने दी चेतावनी, 20 फरवरी तक का मिला समय

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Readymade Garment Cluster jabalpur

Readymade Garment Cluster jabalpur

जबलपुर. रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर की बंद पड़ी 40 इकाइयों को खोलने के लिए फिर अंतिम चेतावनी दी गई है। यदि 20 फरवरी तक इनका संचालन प्रारंभ नहीं होता तो इन्हें निरस्त कर जाएगा। शुक्रवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में क्लस्टर के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। ज्ञात हो कि वर्ष 2014 में इकाइयों का आवंटन किया गया था।

गोहलपुर लेमा गार्डन में संचालित रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर में 200 इकाइयां हैं। इनमें सलवार सूट, शर्ट, लोवर और दूसरे वस्त्रों को तैयार किया जाता है। 40 इकाइयां ऐसी हैं जिनके शटर अभी तक नहीं खुले हैं। पूर्व में कई बार मिली चेतावनी का असर इन पर नहीं हुआ है। वे आज भी उसी िस्थति में हैं। ऐसे में क्लस्टर पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया। यही नही परिसर के रखरखाव के लिए खर्च निकालन भी संचालक मंडल के लिए मुश्किल हो रहा है। इसलिए सभी इकाइयों को खोलने के लिए कहा जा रहा है।

मिल चुका है लंबा समय

कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि इकाईधारक आखिर क्यों अपनी इकाइयों को शुरू नहीं कर रहे हैं। उन्हें लंबा समय मिल चुका है। अब यह बहानेबाजी बिल्कुल भी नहीं चलेगी। उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विनीत रजक से कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई कराएं। जो इकाईधारक इस अवधि में उत्पादन शुरू नहीं करता, उसकी इकाई को निरस्त कर प्रतीक्षा सूची में शामिल कारोबारियों को इसका आवंटन करें। संचालक मंडल को भी इसमें कड़ाई बरतने की जरुरत है।

लॉटरी से हुआ था आवंटन

जबलपुर में क्लस्टर के नाम पर यही पहला प्रोजेक्ट है। जब केंद्र सरकार से इस परियोजना के लिए राशि स्वीकृत हुई, तब निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस बीच 16 दिसंबर 2014 को 2 सौ में से 146 बड़ी निर्माणाधीन इकाइयों का आवंटन लॉटरी के माध्यम से किया गया था। इस काम को हुए 8 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इतनी अवधि में भी कई कारोबारियों ने कपड़ों का उत्पादन बनाना शुरू नहीं किया है। कई बार बैठकों में चेतावनी दी गईं, लेकिन एक भी इकाई का निरस्तीकरण नहीं किया गया। इकाईधारकों की तरफ अपनी इकाई नहीं खोलने का कोई न कोई बहाना बना दिया जाता है।

फैक्ट फाइल
- शहर में 500 इकाइयों में वस्त्रों का हो रहा उत्पादन।

- 300-400 करोड़ कर है अधिक का वार्षिक टर्नओवर।
- 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिला।

- आठ एकड़ में स्थापित है रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर।
- 200 इकाइयां स्थापित। 146 बड़ी इकाई और 54 छोटी ।

- बनते हैं सलवार सूट, शर्ट, सूट और बच्चों के कपडे़।

लोकार्पण व मेला बना सपना
आठ एकड़ भूमि पर 60 करोड़ की लागत से स्थापित क्लस्टर में केंद्र सरकार, राज्य शासन और खुद इकाई धारकों का अंशदान मिला हुआ है। इसमें 146 बड़ी इकाइयों का निर्माण किया गया है तो 54 छोटी इकाइयां तैयार की गई हैं। इसी प्रकार तैयार कपड़ों की धुलाई तथा रंगाई के लिए उपक्रम स्थापित किए गए हैं। इसकी मशीन आए 5 साल हो चुका है। इसी परिसर में कारोबारियों को तकनीकी सहयोग के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर का निर्माण किया गया है। इसमें कार्यालय तो चल रहा है लेकिन राशि के अभाव में बाहर से आने वाले कारोबारियों के लिए डाेरमेट्री और रेस्टारेंट का निर्माण अब तक नहीं हो सका है।

बंद इकाईधारकों को कलेक्टर की तरफ से 20 फरवरी तक का समय दिया गया है। इस अवधि में यदि इनका संचालन प्रारंभ नहीं होता है तो नियमानुसार इनका आवंटन निरस्त करन की कार्रवाई की जाएगी।
दीपक जैन, प्रबंध संचालक, जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइजन क्लस्टर एसोसिएशन