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लाइसेंस की अनिवार्यता में शिथिलता, गोदाम संचालकों को राहत

डब्ल्यूडीआरए के लिए पंजीयन से चल जाएगा काम

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SDM, Naib Tehsildar, and two Patwaris suspended in paddy fraud case

जबलपुर . गेहूं भंडारण के लिए वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के लाइसेंस की अनिवार्यता सम्बंधी नियमों में शिथिलता बरती गई है। इससे गोदाम संचालकों ने राहत महसूस की है। लाइसेंस के लिए आवेदन करने पर अनुबंध के समय इसका प्रमाण (एक्रीडेशन) भी संलग्न करने पर मप्र वेयरहाउसिग एवं लॉजिस्टिक्स कारपोरेशन स्वीकार करेगा। अभी तक किसी एक लाइसेंस का होना जरूरी था। लेकिन, यह कारपोरेशन के गोदामों के अलावा कुछ वेयरहाउस संचालकों के पास ही था। ऐसे में आगामी समय में गेहूं के भंडारण के लिए समस्या खड़ी हो सकती थी। क्योंकि, इस साल भी प्रशासन ने जिले में पांच लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा है। लेकिन, कारपोरेशन की शर्त के अनुसार इतनी जगह उपलब्ध होना मुश्किल हो रहा था। लाइसेंस बनने में छह माह लग जाता है।

पीछे हट रहे थे संचालकलाइसेंस की अनिवार्यता का गोदाम संचालक विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यह परेशान करने वाला कदम था। इस लाइसेंस की अनिवार्यता की शर्त जिस समय लागू की गई, उस समय अनुबंध शुरू हो गए थे। इससे पहले उन्होंने प्रदेश शासन से भंडारण से जुडे़ लाइसेंस लिए हैं। इसलिए डब्ल्यूडीआरए और एफएसएसएआई के लाइसेंस सिरदर्द बन गए थे।

आने लगे हैं बडी संख्या में आवेदन

नियमों में शिथिलता मिलते ही अनुबंध करने वाले गोदाम संचालकों की संख्या बढ़ गई है। ज्यादातर ने लाइसेंस के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है। वे इसका प्रमाणन पत्र कारपोरेशन को उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी मैपिंग शुरू हो गई है।