
retirement age of mp power companies Employees raises
जबलपुर। मध्यप्रदेश में बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंगलवार का दिन नई खुशियां लेकर आया। राज्य सरकार के कर्मचारियों के तरह बिजली कंपनी के कर्मचारी भी अब 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश में कर्मचारियेां की सेवानिवृत्ति आयु में दो वर्ष बढ़ाने की घोषणा के बाद बिजली कंपनी ने भी नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इससे बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर 62 वर्ष हो गई है।
31 मार्च को रिटायर फिर लौटेंगे
बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने संबंधी आदेश मंगलवार को प्रमुख सचिव आईसीपी केसरी ने जारी किया। इस आदेश में 31 मार्च को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी विशेष दिशा निर्देश है। इस आदेश के मुताबिक जो बिजली कर्मचारी 13 मार्च को सेवानिवृत्त हुए उनकी सेवा भी अनवरत मानी जाएगी। इसके चलते 31 मार्च को सेवानिवृत्त होकर गए कर्मचारियों की दोबारा वापसी होगी। इन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद अभी तक बाधित सेवा की अवकाश में गणना की जाएगी।
एक हजार से ज्यादा को फायदा
राज्य सरकार की तर्ज पर बिजली कंपनी में सेवानिवृत्त संबंधी शर्तों में किए गए बदलाव से बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। सूत्रों के अनुसार मौजूदा वर्ष में ही बिजली विभाग के करीब एक हजार कर्मी सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 वर्ष किए जाने से इन सभी की सेवा अवधि में इजाफा हो गया है।
इन कंपनी के कर्मियों को फायदा
- एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी
- एमपी पावर जनरेटिंग कंपनी
- एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी
- एमपी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
- एमपी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
- एमपी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी
सीएम ने इस चिंता के साथ किया था फैसला
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ दिन पहले प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करते वक्त कहा था कि 'उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति में आरक्षण का मामला विचाराधीन होने के कारण प्रदेश सरकार के कर्मचारी और अधिकारी पदोन्नत नहीं हो पा रहे हैं. हम नहीं चाहते हैं कि कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हों, इसलिये कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का निर्णय लिया है।ÓÓ प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण का मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन होने से सभी वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति रुक गई है. इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि शीर्ष अदालत से इस मामले में दो साल के अंदर फैसला हो जायेगा तब प्रदेश के संबंधित कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा सकेगी।
Published on:
03 Apr 2018 05:05 pm

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