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जबलपुर। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दौर में अब रोबोट खेती की बागडोर संभालेंगे। किसानों का काम आसान बनाने युवाओं की टीम ने एग्रीकल्चर रोबोट बनाया है। इस रोबोट से 600 पौधों को लगाने व सब्जी की नर्सरी बनाई जा सकत है। रोबोट का रन टाइम 7 घंटे है। इसे बढ़ाया जा रहा है। रोबोट 360 डिग्री पर दवा का छिड़काव कर सकता है। अग्रांशु द्विवेदी, इनक्यूबेशन सेंटर प्रभारी का कहना है कि इंजीनियरिंग ग्रेजुएट युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग कर कार की बैट्री से स्वचलित एग्रीकल्चर रोबोट बनाया। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद व फंडिग से रोबोट को अपडेट किया जा है।
अब तक 30 लाख की फंडिंग
स्मार्ट सिटी के इनक्यूबेशन सेंटर और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की मदद से रोबोट को अपडेट किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को 30 लाख का फंड मिल चुका है। यूनिवर्सिटी टीम ने 5 लाख, चेन्नई की एक मल्टी नेशनल कंपनी ने 25 लाख की फंडिंग की है। रोबोट बनाने वाली टीम के सदस्य प्रखर मणि ने बताया, मार्च 2024 तक रोबोट मार्केट में उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। अभी एक रोबोट निर्माण लागत 2.50 लाख रुपए है।
नए मॉडल जोड़े जा रहे
प्रखर मणि त्रिपाठी, ऋषि पाटिल, आदित्य सिंह पटेल, मो. कपील आसिफ ने 2021 में एग्रीकल्चर रोबोट का प्रोटोटाइप बनाया था। इसे अपडेट किया जा रहा है। रोबोट का आकार अब मिनी ट्रैक्टर जितना हो गया है। अभी रोबोट में प्लांटेशन व दवा स्प्रे करने के मॉडयूल हैं। अब बीज लगाने, ट्रॉली का मॉड्यूल जोड़ने के लक्ष्य पर काम हो रहा है।
Published on:
10 Jan 2023 05:41 pm
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