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sawan somvar mp3 songs इन भजनों में समाए हैं भोलेनाथ, शब्द शब्द देते हैं दर्शन

इन भजनों में समाए हैं भोलेनाथ, शब्द शब्द देते हैं दर्शन

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Lord Shiva

भगवान शिव

जबलपुर। भगवान की भक्ति का सबसे सशक्त माध्यम हैं गीत भजन। जो कि मन के साथ जुबान भी ईश्वर की भक्ति में लीन कर देते हैं। भगवान शिव के सावन माह में सबसे ज्यादा शिव भजन गाए बजाए जाते हैं। पत्रिका जबलपुर कुछ ऐसे ही चुनिंदा शिव भजन लेकर आया है। जो सोशल मीडिया पर इन दिनों खूब सुने व शेयर किए जा रहे हैं। इन भजनों में कहा जाता है कि स्वयं शिव जी का वास है। जो शब्द शब्द में अपनी अनुभूति कराते हैं। जबलपुर में सबसे ज्यादा भजन मंडलियां इन शिव भजनों को गा रही हैं। इन भजनों को आप चाहें तो सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से आप एमपी3 या वीडियो डाउनलोड भी कर सकते हैं।

शंकर मेरा प्यारा

शंकर मेरा प्यारा, शंकर मेरा प्यारा ।
माँ री माँ मुझे मूरत ला दे, शिव शंकर की मूरत ला दे,
मूरत ऐसी जिस के सर से निकले गंगा धरा ॥

माँ री माँ वो डमरू वाला, तन पे पहने मृग की छाला ।
रात मेरे सपनो में आया, आ के मुझ को गले लगाया ।
गले लगा कर मुझ से बोला, मैं हूँ तेरा रखवाला ॥

माँ री माँ वो मेरा स्वामी, मैं उस के पट की अनुगामी ।
वो मेरा है तारण हारा, उस से मेरा जग उजारा ।
है प्रभु मेरा अन्तर्यामी, सब का है वो रखवाला ॥

शिव नाम से है जगत में उजाला।
हरी भक्तो के है, मन में शिवाला॥

हे शम्भू बाबा मेरे भोले नाथ, तीनो लोक में तू ही तू।
श्रद्धा सुमन मेरा, मन बेलपत्री, जीवन भी अर्पण कर दूँ॥

जग का स्वामी है तू, अंतरयामी है तू, मेरे जीवन की अनमिट कहानी है तू।
तेरी शक्ति अपार, तेरा पावन है द्वार, तेरी पूजा ही मेरा जीवन आधार।
धुल तेरे चरणों की ले कर, जीवन को साकार किया॥ हे शम्भू बाबा ॥

मन में है कामना, कुछ मैं और जानू ना, ज़िन्दगी भर करू तेरी आराधना।
सुख की पहचान दे, तू मुझे ज्ञान दे, प्रेम सब से करूँ ऐसा वरदान दे।
तुने दिया बल निर्बल को, अज्ञानी को ज्ञान दिया॥ हे शम्भू बाबा ॥

आजा भोले नाथ साथ में मिलके रंग जमावांगे
में घोटुंगा भांग नाथ फिर पीके धुम मचावांगे

तेरे भक्त की चौधर कितनी भोले में सबने दिखा दुगा
नीलकण्ठ पे एसी आली दो गाड़ी भिजवा दुगा
रस्ते में तेरे खाण पिन ने टैंंट सकडौ ला दुगा
नीलकंठ पे होंगे फिर खांंदे पींदे आवांगे- में घोटुंगा भांग

कुंडी सोटै भोले नाथ मैने कद के लाके धर राखे
दुध दही के फरमा भी मैने घी के पीपे भर राखे
घास नांदिया की खातिर मैने चार बरिंडे भर राखे
पहाडा ने जा भुल भोले आपा इत ही मौज उडावांगे- में

सत्तर किले भांग भोले मेंं ताजी रोज पिलाउंगा
रगड -2 के कुंड में फिर निखडु दूध मिलाउंगा
बैठे तेरे चरणों में भोले घोट -2 के प्याउंगा
चले खेत मेंं नहर भोले आपा कुद -2 के नहावांगे- मे

तावल करके आजा भोले देखु सु तेरी बाट कती
सारी तैयारी कर राखी में ल्यादुंगा तेरे ठाठ कती
कर्णसिंह तेरा भक्त कसुता नही किसी ते घाट कती
तु भोला में दिल का भोला फिर दोनो मैल मिलावांगे-
में घोटुंगा भांग नाथ फिर पिके

धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये, तीन लोक इक पल भर में।
ऐसे दीनदयाल मेरे दाता, भरे खजाना पल भर में॥

प्रथम वेद ब्रह्मा को दे दिया, बना वेद का अधीकारी।
विष्णु को दिये चक्र सुदर्शन, लक्ष्मी सी सुंदर नारी।
इन्द्र को दे दिये काम धेनु, और ऐरावत सा बलकारी।
कुबेर को सारी वसुधा का, कर दिया तुमने भंडारी।
अपने पास पात्र नहीं रक्खा, रक्खा तो खप्पर कर में ॥
॥ धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये...॥

अमृत तो देवताओं को दे दिये, आप हलाहल पान करे।
ब्रह्म ज्ञान दे दिया उसी को, जिसने आपका ध्यान धरे।
भागीरथ को गंगा दे दई, सब जग ने अस्नान करे।
ब़डे ब़डे पापियों को तारे, पल भर में कल्याण करे।
अपने तन पर वस्त्र न रक्खा, मगन रहे बाघंबर में ॥
॥ धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये...॥

.लंका ग़ढ रावन को दे दिये, बीस भूजा दस सीश दिये।
रामचंद्रजी को धनुष बान, और हनुमान को गदा दिये।
मन मोहन को मुरली दे दई, मोर मुकुट बक्शीश किये।
मुक्ती हेतु काशी में वास, भक्तों को बिस्वाबीश किये।
आप नशे में रहे चूर भोला, भांग पिये नित खप्पर में ॥
॥ धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये...॥

इस में बसा है जी डमरू वाला
तन मेरा मंदिर और मन है शिवाला ,
इसमें बसा है जी बस डमरू वाला,
दिन रात जपता हु बस उसकी माला,
इसमें बसा है जी धमरू वाला,

मुझको ना जाने ये क्या हो गया है,उसकी गली में दिल खो गया है,
ना जाने कैसा ये जद्दू ढाला,इसमें बसा है जी धमरू वाला,

भोले के संग कैसी लागी लगन है आई न नींदिया लगे भूख कम है,
ना पियु पानी न शुहू निवाला इस में बसा है जी डमरू वाला,

देखा यहाँ तक नजर मेरी जाये भोला ही भोला नजर मुझको आये,
रहता है आँखों में उसका उजाला इस में बसा है जी डमरू वाला,

खड़े हैं दर पे दर्शन को चरण शिवजी के छूने को

खड़े हैं दर पे दर्शन को,
चरण शिवजी के छूने को,

कगार मैं जल चढ़ाती हूँ तो वो मछली का झूठा है,
ईसीलिये पैर नहीं पडते तेरे मंदिर में आने को,
खडे है दर पे दर्शन को,
चरण शिवजी के छूने को........

कगार में फूल चढ़ाती हूँ तो वो भँवरे का झूठा है,
ईसीलिये पैर नहीं पडते तेरे मंदिर में आने को,
खडे है दर पे दर्शन को,
चरण शिवजी के छूने को........

कगार में दिल चढ़ाती हूँ तो वो पापों का झूठा है,
अगर में फूल चढ़ाती हूँ तो वो भँवरे का झूठा है,
ईसीलिये पैर नहीं पडते तेरे मंदिर में आने को,
खडे है दर पे दर्शन को,
चरण शिवजी के छूने को......