
school bus operators
जबलपुर। शहर के स्कूलों में स्कूल वाहनों का संचालन एक रैकेट बनाकर किया जा रहा है। जिस तरह से किताब कापियों के खेल शिक्षा माफिया जुड़े हैं उसी तरह बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिए कथित स्कूल वाहन माफिया इसमें शामिल हैं। वाहनों का किराया वे खुद तय करते हैं। उनकी मर्जी के खिलाफ कोई भी किराए मे बदलाव नहीं होता। ऐसे में कुछ वाहन चालक चाहकर भी अभिभावकों को राहत नहीं दे पाते हैं। इसमें स्कूलों की भी गहरी सांठगांठ है।
स्कूल वाहन चालकों के गिरोह ने किराया फिक्स कर रखा है। चाहे स्कूल 10 दिन लगे या 20 दिन लेकिन किराया पूरा एक माह का लिया जाएगा। इसमें किसी भी प्रकार की कोई छूट नहीं की जाएगी। स्कूल वाहन किराया कम से कम 1200 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक वसूल किया जा रहा है। कुछ स्कूल स्वयं ही स्कूल बसों का संचालन कर रहे हैं, जबकि कुछ दूसरे के नाम पर बसों का संचालन कर रहे हैं। जबकि इनकी पूरी दखलांदाजी बसों के संचालन से लेकर उनका किराया तय करने में होती है। कुछ पार्टनशिप में भी यह काम कर रहे हैं। जिसके पीछे बड़ी वजह इसमें भी अभिभावकों से मोटी कमाई करना है। करीब 150 स्कूली बसें संचालित हो रही हैं।
छुट्टियों का भी ले रहे किराया
कई स्कूलों में छुट्टियों के दिनों का भी स्कूल बस का किराया वसूला जाता है। मई- जून में छुटिटयां होने के बाद भी स्कूल संचालक पूरा किराया वसूलने से नहीं हिचकते हैं। अभिभावकों की मजबूरी होती है यदि किराया नहीं दिया या विरोध किया तो बच्चे की पढ़ाई पर इसका असर न पड़े।
स्कूल भले ही 15 दिन लगे, लेकिन किराया पूरे माह का मांगा जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। स्कूल वाहन चालकों ने मानोपॉली बना रखी है। हम पूरी तरह विवश हो चुके हैं हमारी कोई सुनने वाला नहीं है।
- अर्चना गोल्हानी, अभिभावक
स्कूलों में वाहन माफिया हावी है। गिरोह बनाकर वाहनों का संचालन किया जा रहा है। मनमाने रेट तय कर अभिभावकों से वसूली की जा रही है।
- सुनील सिसौदिया, अभिभावक
कई स्कूल टैक्स छुपाने के लिए अप्रत्यक्ष् रूप से स्कूली वाहनों के संचालन से जुड़े हुए हैं। इसलिए इनकी मनमानी हावी है। शासन प्रशासन और संबंधित विभागों को ध्यान देना चाहिए।
- डॉ.अमितेष मिंज, अभिभावक
Published on:
15 Apr 2022 09:51 am
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