
school without teachers news
कटनी । पढ़ाई के मामले में सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर दें सकें इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा प्रयास तो किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार का यह प्रयास सिर्फ भवन निर्माण तक ही सीमित है। जिलेभर की कक्षा 1 से 12वीं तक के स्कूलों में लगभग 60 फीसदी पद खाली पड़े हैं। इन पदों को आज तक भरा नहीं गया। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई पर असर पढ़ रहा है। परिणाम में लगातार गिरावट आ रही है। स्थिति यह रहीं बोर्ड परीक्षा 10वीं 12वीं में जिले की सरकारी स्कूल को कोई भी छात्र प्रदेश की मैरिट सूची में स्थान नहीं बना पाया। संभागभर में भी पढ़ाई के मामले में फिसड्डी रहा।
जर्जर व बिजली विहीन भवन
जिले में सरकारी प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों की संख्या 1998 है। 15 जून से सभी स्कूलों के ताले भी खुल जाएंगे। इनमें से कई स्कूल भवन जर्जर हैं। स्कूल खुलने से पहले स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों को खस्ताहाल भवनों की मरम्मत करवानी थी, लेकिन लापरवाही बरती। अफसरों की इस उदासीनता के कारण विद्यार्थियों को फिर से जर्जर व बिजली विहीन स्कूलों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों ने स्कूलों में सिर्फ किताबें पहुंचाने की बेहतर तरीके से तैयारी की है। 10 जून तक सभी स्कूलों में किताबें पहुंचाने की बात कही जा रही है।
16 स्कूलों में नहीं एक भी शिक्षक
प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 हाईस्कूल व 4 हायर सेकंडरी स्कूलों की सौगात दी है। 15 जून से इन स्कूलों में दाखिला भी शुरू हो जाएगा। जिले में खुली नई हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। जिलेभर की सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सरकार ने बिजली व्यवस्था कराने को कहा था, लेकिन अब तक बिजली नहीं लग पाई है। राज्य शिक्षा केंद्र के अफसरों द्वारा कई बार मांग पत्र भेजा गया। राशि नहीं मिली। जिस वजह से इस शिक्षण सत्र में फिर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अंधेरे में बैठकर पढ़ाई करेंगे।
इसी तरह से जिले की दो हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों को तोड़कर नया भवन बनाना है, इस कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
खास बातें
जिलेभर में 1823 प्राइमरी व मिडिल स्कूल हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं बनी है। मांगने के बाद भी बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए राशि नहीं मिल रही है। जिलेभर में 141 स्कूलों को जर्जर घोषित किया गया। इसमें 57 स्कूलों को गिराकर नया भवन बनाना है, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ। जिलेभर की 1050 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में बिजली नहीं है। राशि नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा। जिलेभर की प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में लगभग 8500 शिक्षकों की आवश्यकता है। 4812 शिक्षक कार्य कर रहे हैं। जिलेभर में 175 हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों की संख्या है। 12 मिडिल स्कूलों को हाईस्कूल बनाया गया। 4 हाईस्कूल को हायर सेकंडरी स्कूलों में उन्नयन हुआ। 60 प्रतिशत स्कूलों में नहीं हैं खेल मैदान की सुविधा।
अतिथियों से करवाई जाएगी पढ़ाई
स्कूलों में बेहतर तरीके से पढ़ाई हो, इसके लिए जिन स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, उनमें अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार प्रदेश सरकार व स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों द्वारा प्रयास किया जा रहा है।
आरएस पटेल, प्रभारी जिला शिक्षाधिकारी
Updated on:
02 Jun 2018 06:22 pm
Published on:
02 Jun 2018 06:19 pm
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