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भतीजे को बेचने जा रहा था चाचा, बीच रास्ते खुला खौफनाक राज

रेलवे स्टेशन पर मिला 12 साल का किशोर, जज ने पहुंचाया वापस घर, 17 बेसहारा बच्चों को मिली मदद

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Prem Shankar Tiwari

Jul 21, 2017

Child trafficking

Child trafficking

जबलपुर। एक बच्चे को उसका चाचा ही बेचने की तैयारी में था। वह भतीजे को ऐसे हाथों में सौंपने जा रहा था, जो उसका बचपन निगल लेते। उसे बाल श्रम की आग में झोंक दिया जाता। रेलवे स्टेशन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम की नजर बालक पर पड़ी। उन्होंने बालक से पूछताछ की इस बीच उसका चाचा गायब हो गया। छानबीन में पता चला कि चाचा के इरादे नेक नहीं थे। टीम ने बच्चे को सकुशल उसके घर पहुंचाया। यह सब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम और सीबीआई की विशेष जज के संयोजन में रेलवे स्टेशन पर आयोजित हुए जागरुकता शिविर के दौरान संभव हुआ। शिविर के अंतर्गत 17 अन्य बेसहारा बच्चों के चेहरे पर मुस्कान वापस लौटाई गई।

ऐसे हुआ सवाल-जवाब
' बेटा, डरो मत, तुम्हारा कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ेगा, जज आंटी को बताओ, तुम कहां जा रहे हो ?' ' जी (लरजते स्वर मेें ) मेरे चाचा मुझे दमोह ले जा रहे हैं। ' वो कहां हैं, दमोह में तुम्हारा कोई रिश्तेदार रहता है क्या ? ' नहीं, मैडम जी, वहां होटल में काम करने के लिए जा रहा हूं। चाचा आप लोगों को देखकर कहीं चले गए। ' ' आप करना चाहते हो यह काम ?' 'नहीं मैडम जी, मैं पढऩा चाहता हंू ।' 'ठीक है तुम चिंता मत करो बेटे, हम तुम्हारे घर के लोगों को बुलवाते हैं। आओ, बिस्किट खाओ...।' यह संवाद है रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-एक पर मौजूद विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम के सदस्य, सीबीआई की विशेष न्यायाधीश माया विश्वलाल व 12 साल के उसे बालक के बीच के, जिसे बालश्रम की आग में झोंकने के लिए उसका सगा चाचा उसे ले जा रहा था। आननफानन में उससे पूछ कर उसके परिजनों को सूचना दी गई। बालक को उसकी दादी के सुपुर्द कर दिया गया।


Child trafficking


दिनभर प्लेटफॉर्म पर घूमी टीमें
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम, सीबीआई की विशेष जज माया विश्वलाल, पैरालीगल वालंटियर्स, जागृति सेंटर के वालंटियर्स, जीआरपी, आरपीएफ व अन्य के संयोजन में शुक्रवार को रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक-1 पर बेसहारा बच्चों के लिए जागरुकता शिविर का आयोजन किया। सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक विभिन्न टीमों ने सभी 6 प्लेटफॉर्मों, ट्रेनों, यार्ड सहित रेलवे स्टेशन के विभिन्न हिस्सों में कार्रवाई की।
जजों, अफसरों ने समझाया
बेसहारा बच्चों को चिह्नित कर उन्हें शिविर तक लाया गया। इनमें से कई पंक्चर जोडऩे वाले सॉल्यूशन जैसे खतरनाक नशे के आदी हो चुके थे। वहां उपस्थित जज विश्वलाल, रेलवे मजिस्ट्रेट कपिल सोनी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अखिलेश मिश्रा, जिला विधिक सेवा अधिकारी प्रदीप सिंह ठाकुर ने बच्चों को नशे की लत छोडऩे के लिए समझाया। इन्हें इनके अभिभवकों के सुपुर्द करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। इस दौरान 17 बेसहारा बच्चों को उनके घर पहुचाया गया। दो बच्चों को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया गया।

मानसिक दिव्यांग वापस लौटा घर
लगभग 15 वर्ष की उम्र का नई बस्ती गोहलपुर निवासी बालक मानसिक रूप से दिव्यांग है। वह स्कूल जाने के लिए घर से निकला, लेकिन स्टेशन कैसे पहुंच गया, उसे नहीं पता। पूछने पर उसने अपना पता जरूर बताया। उसे उसके परिजनों को बुलाकर उनके सुपुर्द किया गया।