18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीवर लाइन के काम में अब नहीं होती ज्यादा तोड़फोड़, जबलपुर में इस तकनीक से चल रहा काम

शहर में कई जगह नई तकनीक बनी मददगार  

less than 1 minute read
Google source verification
jmc.jpg

Sewer Line

जबलपुर। शहर के पुराने रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में चौराहों, नालों, पुल-पुलिया, जलापूर्ति पाइप लाइन को नुकसान पहुंचाने बिना सीवर लाइन बिछाने में होरीजोंटल डायरेक्शनल ड्रिलिंग (एचडीडी) तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है। मिनिमल इम्पैक्ट ट्रेंचलेस मशीन से पाइप की परिधि के आकार में होरीजोंटल (क्षैतिज) सुरंगनुमा खुदाई की जाती है। यानी स्थल पर छोटे स्पेस को छोडकऱ ज्यादा जगह ऊ परी सतह की खुदाई नहीं करनी पड़ती। इससे ऊपरी निर्माण सुरक्षित रहते हैं।

ऐसे समझें
एचडीडी तकनीक में जमीन के नीचे 3.5 मीटर से ज्यादा गहराई में सुरंगनुमा आकार में खुदाई की जाती है। इससे आसपास का पुराना निर्माण क्षतिग्रस्त नहीं होता और आसानी से पाइप लाइन बिछा दी जाती है।

अंडरग्राउंड यूटिलिटी को न पहुंचे नुकसान
नगर के पुराने रिहायशी इलाकों में जलापूर्ति के लिए डाली गई पाइप लाइन और दूरसंचार कम्पनियों के केबल बिछाए गए हैं। इन क्षेत्रों में पुराने नाले, पुल-पुलिया भी हैं। ऐसे में सीवर लाइन बिछाने के दौरान इन्हें सुरक्षित रखने के लिए एचडीडी तकनीक से ज्यादा गहराई तक होरीजोंटल ड्रिलिंग कर पाइप लाइन बिछाई जाती है। एक बार ड्रिलिंग कर 200-250 मीटर लम्बी पाइप लाइन डाली जाती है।

ऐसे स्थान जहां गहराई तक खुदाई करना पड़ता है, वहां सीवर लाइन बिछाने में होरीजोंटल डायरेक्शनल ड्रिलिंग तकनीक काफी उपयोगी साबित हो रही है। इससे चौराहा, नाला, पुल-पुलिया, पाइप लाइन, केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचाए बिना सीवर लाइन बिछाना आसान हो जाता है। समय भी कम लगता है।
कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नगर निगम