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आदि शंकराचार्य की यह प्रतिमा है अद्भुत, आप भी जानिए इसकी खासियत

अमखेरा स्थित कुदवारी में आद्य शंकराचार्य की मूर्ति  

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shankaracharya jayanti 2018

shankaracharya jayanti 2018

जबलपुर। संसारभर में सनातन धर्म की ध्वजा फहराने वाले, भगवान शिव के अवतार आद्य शंकराचार्य के जन्मोत्सव पर आज नगर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही इन कार्यक्रमों का शुभारंभ हो गया है। आज होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में कहीं आद्य शंकराचार्य महाराज की पादुका पूजन की जा रही है तो कहीं उनकी प्रतिमा की स्थापना की जा रही है।


मूर्ति प्रतिष्ठा आज
आद्य गुरु शंकराचार्य के अवतरण दिवस पर अमखेरा स्थित कुदवारी में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यहां आद्य शंकराचार्य की मूर्ति की प्रतिष्ठा की जाएगी, शुक्रवार को सुबह से ही इस कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। यहां अनेक अनुष्ठान होगे, प्रभात फेरी, सुहागल व प्रवचन का आयोजन होगा। कुदवारी में मूर्ति स्थापना का काम दसनाम गोस्वामी समाज के तत्वावधान में किया जा रहा है। यहां आद्य शंकराचार्य महाराज की संगमरमर की मूर्ति की स्थापना की जा रही है।


कौन थे आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य महान हिंदू दार्शनिक एवं धर्मगुरु थे। वैशाख मास की शुक्ल पंचमी पर उनकी जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 788 ईसा पूर्व केरल के कालड़ी कस्बे के एक नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हिंदू धार्मिक मान्यता अनुसार, इन्हें भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। यह अद्वैत वेदांत के संस्थापक और हिंदू धर्म प्रचारक थे। आदि शंकराचार्य जीवनपर्यंत सनातन धर्म के जीर्णोद्धार में लगे रहे। उनके प्रयासों ने हिंदू धर्म को नवचेतना प्रदान की।


हिंदू धर्म के महान प्रतिनिधि
आदि शंकराचार्य जयंती पर शंकराचार्य मठों में पूजन-हवन होता है। अनेक प्रवचनों एवं सत्संगों का आयोजन भी होता है। सनातन धर्म के महत्त्व पर उपदेश दिए जाते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र समय अद्वैत सिद्धांत का पाठ करने से व्यक्ति को परेशानियों से मुक्ति मिलती है। आदि शंकराचार्य को हिंदू धर्म के महान प्रतिनिधि के तौर पर जाना जाता है। आदि शंकराचार्य को जगदगुरु एवं शंकर भगवद्पादाचार्य के नाम से भी जाना जाता है। द्विपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी भी आदि शंकराचार्य की स्थापित परंपरा के प्रतिनिधि हैं।