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जबलपुर। संसार में भय का कारण भगवान से विमुख होना ही है। श्रद्धा, भक्ति से भगवान का भजन अभय का कारण है। भगवान हृदय से भाव व प्रेम को देखते हैं। विधि विधान की अपेक्षा भक्ति में भाव की प्रधानता है। दमोह नाका गोपाल सदन गोपाल बाग में श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को स्वामी गिरीशानंद ने ये उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, उत्तम भागवत धर्म यही है कि हम जो करते हैं, वह निष्काम भाव से भगवान को सौंप दें। कथा में विवेक पाठक, युवराज गढ़वाल, विनय सक्सेना, हेमराज अग्रवाल, डॉ. प्रहलाद दास अग्रवाल, अंकुर शाही, तेज रतन, विजया बियानी, बीएल रूसिया, राम भारती, परशुराम मिश्र, ओंकार दुबे, हरीश रावल, रेखा बेन, आरएन सिंह, गिरिराज, प्रवीण शर्मा, कैलाश अग्रवाल, वासुदेव शास्त्री एवं शैलेंद्र तिवारी मौजूद थे।
शरणागत को निहाल करते हैं भगवान
जबलपुर। संकोच त्यागकर मित्र सुदामा शरण में आए तो प्रभु ने उन्हें निहाल कर दिया। वास्तव में प्रभु श्रीकृष्ण शरणागत वत्सल हैं। जो भी इनकी शरण में आता है। कृष्णा कॉलोनी में श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर यह बात कथा व्यास पंकज शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि प्रभु को समर्पित करते हुए कर्म करते रहना चाहिए। वे हर बिगड़ी को बना देते हैं। कथा के पूर्व वंदना ठाकुर, सीता शर्मा, विक्की गोस्वामी, श्याम अग्रवाल, रामकिशोर पांडेय सहित आदि ने व्यास पूजन किया।
‘परमात्मा का कोई आकार नहीं है’
जबलपुर।‘परमात्मा का कोई आकार नहीं है। वह निराकार है। जब अत्याचार बढ़ता है और साधुजन को सताया जाता है, तो तब प्रभु अवतार लेते हैं।’ सुहागी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को स्वामी विनेश्वरानंद ने ये उदगर व्यक्त किए। जब जब होहि धर्म की हानि... के लय में कथा व्यास धर्म का भाव प्रगट किया तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। रमेश मिश्रा, लक्ष्मीकांत श्रीवास्तव, ओम प्रकाश बागरी, राजेश साहू, गोलू ठाकुर, अजय स्वामी, सुरेंद्र सेन, विनोद दुबे एवं मनीष मिश्रा सहित आदि मौजूद थे।
Published on:
16 Jan 2019 07:30 am
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