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पावर प्लांट के लिए उलीच लीं नदियां, मुरझाने लगी फसलें

एनटीपीसी प्लांट के लिए सीतारेवा और शक्कर से निकाला पानी, कलेक्टर ने सिंचाई विभाग को पुनर्विचार के दिए आदेश
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neeraj mishra

Dec 27, 2016

narmada

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जबलपुर। एक ओर नदी जल संरक्षण के लिए क्षेत्र में नर्मदा यात्रा निकाली जा रही है दूसरी ओर नर्मदा की सहायक नदियों को उलीचकर उन्हें खोखला बनाया जा रहा है। नरसिंहपुर जिले में गाडरवारा तहसील की दो प्रमुख नदियों सीतारेवा और शक्कर नदी विकास की भेंट चढ़ गई हैं। एनटीपीसी के पावर प्लांट के लिए इन नदियों का इतना पानी लिया गया कि इनका वजूद ही खतरे में पड़ गया है।

प्यासे हैं मवेशी, मुरझा रही हैं फसलें

गाडरवारा में एनटीपीसी का थर्मल पावर प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माणाधीन प्लांट में पानी की पूर्ति सीतारेवा और शक्कर नदियों से की जा रही है। इन नदियों से पानी का ऐसा अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है कि नदियों की धार ही सिमट गई है। सर्दी के इस मौसम में भी नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में पानी की कमी महसूस की जाने लगी है। चीचली के किसान परमेश्वर पटेल बताते हैं कि प्लांट में पानी का ऐसा बेतहाशा इस्तेमाल भविष्य में जलस्तर के लिए भी आशंकित कर रहा है। नदियां सूखने से जलस्तर नीचे जाएगा ही। अभी भी सिंचाई के साथ-साथ जानवरों के लिए पीने का पानी का संकट सामने आने लगा है।

किसानों ने कलेक्टर को बताए तथ्य

एनटीपीसी द्वारा नदियों के पानी के अंधाधुंध दोहन से चिंतित किसानों, नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर आरआर भोंसले से मिलकर इस तथ्य से अवगत कराया। अब कलेक्टर ने मामले में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से उचित कदम उठाने को कहा है। कलेक्टर ने बताया कि एनटीपीसी को सिंचाई विभाग के द्वारा नदियों से 1000000 क्यूबिक मीटर पानी लेनेे की अनुमति प्रदान की गई है। प्लांट के लिए अभी तक 80000 क्यूबिक मीटर पानी उठाया गया है। अब सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री को इस आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है।