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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि एक्साइज एक्ट 1915 के तहत पुलिस के सब इंस्पेक्टर को लायसेंसी शराब दुकान या परिसर का निरीक्षण, जांच करने का विधिक अधिकार नहीं है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने कहा कि सब इंस्पेक्टर द्वारा दुकान कर्मियों के खिलाफ दर्ज आबकारी एक्ट का प्रकरण व अदालत में पेश चार्जशीट न केवल कानूनी अधिकार बल्कि उसके क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर किया गया कार्य है। इस मत के साथ कोर्ट ने शराब दुकान कर्मियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण निरस्त कर दिया।
यह है मामला-
बिलासपुर छत्तीसगढ़ निवासी पंकज सिंह ने यह अर्जी दायर की। इसके मुताबिक वे अनूपपुर जिले के जैतहरी के राठौर चौक में शराब दुकान के लायसेंसी ठेकेदार हैं। 12 अप्रैल 2018 को जैतहरी पुलिस थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर डीके दाहिया ने उनकी दुकान में छापामार कार्रवाई की। उन्होंने दुकान से 239 लीटर देशी शराब की जब्ती बनाते हुए दुकान के दो कर्मियों सुनील सिंह व राजेंद्र जायसवाल सहित याचिकाकर्ता के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(1) , 34 ( 2), 39 ( ए) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया।
चार्जशीट भी पेश कर दी
24 नवंबर 2018 को संब इंस्पेक्टर दाहिया ने जेएमएफसी अनूपपुर की कोर्ट में मामले की चार्जशीट भी पेश कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि आबकारी एक्ट की धारा 51 के तहत पुलिस सब इंस्पेक्टर को लायसेंसी दुकान में छापा मारने या जांच का अधिकार नहंी है।
डीईओ ही कर सकता है जांच
अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि लायसेंसी शराब दुकान की जांच या निरीक्षण केवल कलेक्टर या आबकारी अधिकारी की शिकायत या रिपोर्ट पर ही की जा सकती है। वह भी जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) स्तर के अधिकारी के द्वारा। कोर्ट ने इस मत के साथ याचिका मंजूर कर ली। याचिकाकर्ता व उसके कर्मियों के खिलाफ दर्ज आबकारी एक्ट का प्रकरण व उसमें पेश चार्जशीट को कोर्ट ने निरस्त करने के निर्देश दिए।
Published on:
27 Mar 2019 10:00 am
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