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अब 65 साल की आयु तक नौकरी कर सकेंगे निजी कॉलेजों के प्रोफेसर

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की लार्जर बेंच का आदेश किया निरस्त  

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Supreme Court

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जबलपुर। प्रदेश में संचालित निजी एवं अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्रोफेसर भी अब राज्य सरकार के कॉलेजों की भांति 65 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से इसकी राह प्रशस्त हो गई। शीर्ष कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के तीन जजों की लार्जर बेंच के फैसले को अनुचित बताते हुए निरस्त कर दिया। सुको के जस्टिस एल नागेश्वर राव व जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने राज्य सरकार को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।

यह है मामला
निजी महाविद्यालय के प्रोफेसर आरएस सोहाने सहित अन्य ने यह अपीलें सुको के समक्ष दायर कीं। कहा गया कि मप्र शासकीय सेवक (अद्र्धवार्षिकी आयु )अधिनियम 1967 में 1998 में संशोधन किया गया। इसके तहत सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट आयु 60 से 62 वर्ष कर दी गई। निजी अनुदानप्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को भी इसका लाभ दिया गया। 2004 में राज्य सरकार ने कॉलेज कोड 28 में सशोधन किया। 2010 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) ने रेगुलेशन बना कर कॉलेजों के प्रोफेसरों-शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष तय कर दी। इनके आधार पर राज्य सरकार ने 2 मई 2011 को पुन: मप्र शासकीय सेवक (अद्र्धवार्षिकी आयु )अधिनियम में संशोधन किया व कॉलेज प्रोफसरों की रिटायरमेंट आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी। लेकिन याचिकाकर्ता सहित अन्य निजी अनुदान प्राप्त कॉलेजो के प्रोफेसरों को इसका लाभ नहीं मिला। इस पर उन्होंने पूर्व की भांति सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों के समान रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने व संगत वेतनमान का लाभ उन्हें भी देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया। इसके खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की गई। डिवीजन बेंच ने इस संवैधानिक प्रश्न का निराकरण करने तीन जजों की वृहद खंडपीठ को भेजा। 8 मई 2017 को लार्जर बेंच ने यह कहते हुए इस प्रश्न का निराकरण कर दिया कि कॉलेज कोड 28 में संशोधन नहीं हुआ। बल्कि स्टैंडिंग कमेटी ने कोआर्डिनेशन कमेटी को प्रस्ताव भेजा था। जिसे नहीं माना गया। कोर्ट ने कहा कि यूजीसी के नियमों को मानने के लिए राज्य सरकार बाध्य नहीं है।

सुको ने पलट दिया फैसला
हाईकोर्ट की लार्जर बेंच के इसी फैसले को सुको में चुनौती दी गई। अधिवक्ता एलसी पाटने ने तर्क दिया कि कॉलेज कोड 28 में संशोधन के 7 जनवरी 2004 के प्रस्ताव की भाषा महज अनुमोदन की नहीं थी। इसके जरिए कोड 28 में संशोधन हुआ था। सुको ने उनके तर्कों से सहमति जताते हुए अपीलें मंजूर कर लीं। शीर्ष कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ताओं सहित निजी अनुदानप्राप्त कॉलेजों के प्रोफेसरों को 65 साल में रिटायर किया जाए। जिन्होंने 65 साल की आयु तक काम किया, उनकी सेवाएं तभी तक मानी जाएं। इसके संगत अन्य लाभ भी उन्हें दिए जाएं।