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शहर की बेटी सुरभि ने दर्ज कराया इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम

लगातार 6.17 घंटे तक की श्रीमद् भागवत गीता की विवेचनानागपुर से आई इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड की जज डॉ. सुनीता धोटे ने प्रदान किया सर्टिफिकेट

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India Book of Records

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जबलपुर। शहर की बेटी सुरभि मुले ने बिना रुके 6.17 घंटे तक श्रीमद् भागवत गीता की विवेचना कर इंडिया बुक ऑफ में अपना नाम दर्ज कराया है। उन्होंने गुरुवार सुबह 8.15 बजे से दोपहर 3.10 बजे तक श्रीमद्भागवत गीता के श्लोंको का वाचन और उनकी विवेचना की। नागपुर से आई इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड की जज डॉ. सुनीता धोटे ने इसकी बारीकी से जांच की। रिकार्ड बनाने पर देर शाम सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया। दिल्ली से भी टीम इसकी मॉनीटरिंग कर रही थी। इस दौरान पूर्व महापौर स्वाति गोडबोले भी मौजूद थीं।

दो बार लिया ब्रेक
श्रीमद् भागवत गीता की विवेचना के दौरान सुरभि ने मात्र दो बार बे्रक लिया। पहला बे्रक 8वें अध्याय और दूसरा ब्रेक 14वें अध्याय में लिया। हालांकि वे ब्रेक लेना नहीं चाहती थीं, लेकिन जज ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा।

सुबह से कुछ नहीं खाया था
10वीं कक्षा की छात्रा सुरभि के पिता अखिल मुले ने बताया कि गुरुवार को उपवास होने के कारण उसने कुछ भी खाया-पीया नहीं था। निर्णायकों के जोर देने पर एक केला खिलाया गया। वे बेटी की इस उपलब्धि को शब्दों में बयां नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि सुरभि आठ वर्ष की उम्र से दादी विजया मुले से श्रीमद् भागवत गीता को अर्थ सहित पढऩा सीख रही है। वह लगातार 18 अध्यायों के 700 श्लोक सुना सकती है।

हर घर में रामायण-गीता, लेकिन पढ़ते नहीं : सुरभि
सुरभि ने कहा कि हर घर में रामायण और श्रीमद्भागवत गीता है, लेकिन लोग पढ़ते नहीं। इसीलिए उसे अपने जीवन में नहीं उतार पाते। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि धर्मग्रंथों को केवल बुढ़ापे में ही पढ़ा जाए। युवाकाल में भी उनका अध्ययन किया जा सकता है। इससे मन शांत रहता है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। अब उनका इरादा गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराने का है।