सूर्य नमस्कार से धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कोर्ट ने नकारी
जबलपुर. सूर्य नमस्कार विशुद्ध रूप से योग है, इसमें कहीं भी धार्मिक उपासना नहीं है— हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की याचिका पर यह बात कही है. भोपाल के विधायक मसूद के इस तर्क को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया कि इससे उनके धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.
कोर्ट ने पूछा कि योग से धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि सूर्य नमस्कार केवल योगाभ्यास है. इसमें कहीं भी धार्मिक उपासना की कोई विधि ही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि सूर्य नमस्कार वस्तुत: स्वास्थ्य और जीवन की जरूरत है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि योग से धार्मिक भावनाएं कैसे आहत हो सकती हैं.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस पीके कौरव की डिवीजन बैंच ने ये टिप्पणियां की हैं. डिवीजन बैंच ने भोपाल के विधायक आरिफ मसूद की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सूर्य नमस्कार करने के लिए किसी के लिए कहां लिखा है कि कोई बाध्यता है.
धर्म के लोगों की भावनाओं को देखते हुए सूर्य नमस्कार को स्वैच्छिक करने के निर्देश की अपील- सुनवाई के दौरान विधायक आरिफ मसूद की ओर से कोर्ट के समक्ष ये तर्क दिया गया कि सूर्य नमस्कार से उनके धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. विधायक आरिफ मसूद की ओर से कोर्ट से ये अपील भी की गई कि धर्म के लोगों की भावनाओं को देखते हुए सूर्य नमस्कार को स्वैच्छिक करने के निर्देश दिए जाएं.
कोर्ट ने पूछा, कहां लिखा है कि बाध्यता है
सुनवाई के बीच हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि परिपत्र में कहां लिखा है कि यह किसी प्रकार की बाध्यता है. इस पर याचिकाकर्ता ने कुछ दस्तावेज पेश करने के लिए मोहलत मांगी. इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज पेश करने के लिए मोहलत दे दी. मामले की अगली सुनवाई आठ फरवरी को नियत की गई है.