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पैसों की कमी से खेलना छोड़ा, एक आंख की रोशनी गई फिर बनी टीम इंडिया की कप्तान

आंखों की रोशनी गई तो हौसलों ने बनाया क्रिकेट का सितारा, सुषमा इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम की कप्तान

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जबलपुर. ये क्रिकेटर हौसले का दूसरा नाम है। उनके पास न तो पैसा था और न ही कोई अन्य संसाधन। गांव में किसान पिता किसी तरह परिवार का खर्च चला रहे थे। ऐसे में एक दिन खेलते हुए उनकी आंख में चोट लगी जिससे एक आंख की रोशनी चली गई और दूसरी आंख में कम दिखाई देने लगा। हालात बदतर होते गए पर उन्होंने हौसला नहीं खोया। अपनी इसी खूबी की दम पर अब वे इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम की कप्तान बन गई हैं।

दमोह जबेरा की सुषमा पटेल इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम की कप्तान बनीं हैं। मूलत: मौली गांव की रहनेवाली सुषमा मप्र की ब्लाइंड क्रिकेट टीम की पहली कप्तान हैं। टीम इंडिया की कप्तान के रूप में अब वे वर्ल्ड गेम में अपना हुनर दिखाएंगी। वे अगस्त में इंग्लैंड (बर्मिंघम) जाएंगी और यहां इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन के तत्वावधान में होनेवाली प्रतियोगिता में शामिल होंगी।

सुषमा पटेल की इस उपलब्धि पर हर कोई खुशी जता रहा है हालांकि इसके लिए उन्होंने अथक संघर्ष किया है। सुषमा पटेल के शिखर तक पहुंचने की कहानी बेहद रोचक है। छह साल की उम्र में खेलते समय उनकी आंख में गंभीर चोट लग गई। इससे एक आंख की रोशनी चली गई तो दूसरी भी कमजोर हो गई। किसान पिता बाबूलाल से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई तो उन्होंने हामी भर दी।

इसके लिए वे सन 2015 में जबलपुर आई, लेकिन आर्थिक संकट ने घेरा तो घर लौटना पड़ा। फिर 2022 में दोबारा बल्ला थामा। वे बी-3 कैटेगरी की प्लेयर हैं। अब सुषमा इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन के इंग्लैंड (बर्मिंघम) में वर्ल्ड गेम में टीम के साथ हिस्सा लेंगी। यह प्रतियोगिता 18 से 27 अगस्त तक चलेगी।