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नर्मदा के इस घाट पर मौजूद है स्वर्गद्वारी, सरकार के इस कदम ने कम किया महत्व

धरी रह गईं शहर को पर्यटन हब बनाने की उम्मीद

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swarg jane ka rasta in narmada valley

swarg jane ka rasta in narmada valley

जबलपुर। वैसे तो नर्मदा के हर घाट पर एक नया नजारा, नया अनुभव और नयापन मौजूद है। लेकिन जबलपुर से होकर गुजरने वाली जीवनदायिनी नर्मदा ने जमकर प्यार उड़ेला है। यहां नर्मदा के सबसे हसीन व खूबसूरत नजारे दिखाई देते हैं। इनमें से एक है धुआंधार की स्वर्गद्वारी। जो देखते में किसी स्वर्ग की अनुभूति तो कराती ही है, साथ ही प्रकृति की अद्भुत लीलाओं से भी पर्यटकों, चिंतकों व पर्यावरण प्रेमियों से परिचय भी कराती है। लेकिन इसे वो पहचान नहीं मिल पा रही है जो इसका हक है। सरकार ने एक बार फिर इसके साथ छलावा किया है।

news facts-

संस्कारधानी की फिर अनदेखी
देशभर में 17 स्थलों का चयन
मध्य प्रदेश से केवल खजुराहो शामिल

पर्यटन हब के लिए चिह्नित स्थल
- 01 स्थल मध्यप्रदेश से खजुराहो
- 02-02 स्थल उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से
- 03 स्थल दिल्ली से
- 01-01 स्थल गोवा, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, केरल और बिहार से

धुआंधार से स्वर्गद्वारी तक की सुहानी वादियां दुनियाभर के पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। बॉलीवुड के सितारे भी यहां आकर नि:शब्द हो जाते हैं। ऐसे प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों से समृद्ध जबलपुर को पर्यटन हब बनाने की उम्मीदें फिर धरी रह गईं। केंद्र सरकार के बजट में अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप 12 क्लस्टर में विकसित करने के लिए देश के 17 पर्यटन स्थलों को चुना गया। इनमें मध्यप्रदेश से केवल खजुराहो को शामिल किया गया है। जानकारों के अनुसार, खजुराहो में पहले से दुनियाभर के पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं। पर्यटन के लिहाज से निजी क्षेत्र की भागीदारी के कारण वहां आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार है।

स्पेशल पैकेज की थी उम्मीद
पर्यटन स्थलों से समृद्ध जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दरकार है। केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल के जबलपुर निवासी होने के कारण उम्मीद थी कि पर्यटन हब बनाने के लिए शहर को बड़ा पैकेज उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन, एक बार फिर संस्कारधानी की अनदेखी की गई। जबकि केंद्रीय मंत्री पटेल ने पदभार सम्भालने के बाद नगर आगमन पर कहा था कि पर्यटन के लिहाज से क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने में कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगे।