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जबलपुर। अमर शहीद टंट्या भील की शहीद स्थली नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल से पवित्र मिट्टी को कलश में रखकर उनकी जन्मस्थली खंडवा के लिए भेजी गई। गुरुवार को जिले के प्रभारी एवं लोक निर्माण कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री गोपाल भार्गव के मुख्य आतिथ्य यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
12 साल तक अंगे्रजों से लड़े
टंट्या भील भील जनजाति के सदस्य थे। उनका जन्म 1840 में पूर्वी निमाड़ (खंडवा) की पंधाना तहसील के बडाडा गांव में हुआ था। उन्होंने 12 साल तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया। वह आदिवासियों और आम लोगों की भावनाओं के प्रतीक बन गए।
सेंट्रल जेल में दी गई थी फांसी
टंट्या भील को धोखे से गिरफ्तार कर लिया गया। इंदौर में ब्रिटिश रेजीडेंसी क्षेत्र में सेंट्रल इंडिया एजेंसी जेल में रखा गया था। बाद में उन्हें जबलपुर ले जाया गया। उन्हें भारी जंजीरों से जकड़ कर जबलपुर जेल में रखा गया। केंद्रीय जेल जबलपुर में 4 दिसम्बर 1889 को उन्हेंं फ ांसी दी गई। टंट्या भील का मूल नाम तांतिया था। उन्हें प्यार से टंट्या मामा के नाम से बुलाया जाता था। उन्हें भारत का रॉबिन हुड भी कहा जाता है।
Published on:
25 Nov 2021 09:05 pm
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