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 इस नदी के तट पर हैं 10 करोड़ तीर्थ, मात्र दर्शन से मिलता है पुण्य

नर्मदा न केवल मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवन दायिनी है बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है

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neeraj mishra

Dec 15, 2016

narmada river

narmada river

जबलपुर। भारत के मध्यभाग में बहने वाली नर्मदा न केवल मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवन दायिनी है बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है। पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली यह मात्र एक नदी है। नर्मदा को गंगा के समान पूजनीय नदी माना जाता है। कहा जाता है जो पुण्य गंगा में स्नान करने से मिलता है वही पुण्य महज नर्मदा के दर्शन से प्राप्त होता है। इसके उद्गम से लेकर संगम तक दस करोड़ तीर्थ हैं।

मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, कूर्म पुराण ने नर्मदा की महत्ता एवं उसके तीर्थों का वर्णन किया गया है। मत्स्य पुराण एवं पद्म पुराण में बताया गया है कि अमरकंटक में नर्मदा के उद्गम से खंभात की खाड़ी तक 10 करोड़ तीर्थ हैं।


अग्नि पुराण के मत अनुसार 60 करोड़ व कूर्म पुराण के अनुसार 60 सहस्र तीर्थ नर्मदा के तट पर हैं। नारदीय पुराण के अनुसार नर्मदा के दोनों तटों पर 400 मुख्य तीर्थ हैं, लेकिन अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक साढ़े तीन करोड़ तीर्थ हैं।


इन ग्रंथों में है नर्मदा का जिक्र

नर्मदा मेकल पर्वत अमरकंटक से निकलती है, इसलिए इसे मेकल कन्या भी कहा जाता है। स्कंद पुराण में इसका वर्णन रेवा खंड के अंतर्गत किया जाता है। कालिदास ने मेद्यदूतम में इसे रेवा से संबोधित किया है। अमरकंटक में सुंदर सरोवर में स्थित शिवलिंग से निकलने वाली इस पावन धारा को रुद्र कन्या भी कहते हैं। करीब 1310 किमी का प्रवाह पथ तय कर नर्मदा भरौंच के आगे खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। इसके तट पर कई तीर्थ हैं।

matasy puran

ये हैं नर्मदा के तट पर कुछ तीर्थ

डिंडौरी- नर्मदा यहां डिंडौरी जिले की जीवनदायिनी के नाम से जानी जाती है। यहां पर कई मंदिरों की स्थापना नर्मदा तट पर की गई है।
मंडला- मंडला को महिष्मति नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम नर्मदा के कारण ही पड़ा था। नर्मदा ने यहां मंडला को तीन ओर से घेरा हुआ है।
अमरकंटक- यह नर्मदा का उद्गम स्थल हैं। यहां मेकल की पहाडिय़ों से नर्मदा का उद्गम होता है। करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र है।


ग्वारीघाट- यह स्थान जबलपुर में है। यहां करोड़ो तीर्थयात्री प्रतिवर्ष पहुंचते हैं। यहां नर्मदा तट पर बने सैकड़ों मंदिर आस्था का केन्द्र हैं।
महेश्वर तीर्थ- यह तीर्थ ओंकार के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है यहां से एक तीर से रुद्र ने बाणासुर से तीन नगरनियां जला डालीं थीं।
भृगु तीर्थ- इस तीर्थ के दर्शन से मनुष्य पाप मुक्त हो जाता है। जिसमें स्नान करने से स्वर्ग मिलता है। यहां से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जामदग्न्य तीर्थ- यह वह तीर्थ है जहां नर्मदा समुद्र में मिलती है। कहा जाता है कि यहां भगवान जनार्दन ने पूर्णता प्राप्त की थी।

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