18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

300 करोड़ का टर्न ओवर, 500 कारखाने, फिर भी टैक्सटाइल्स पार्क कागजों में कैद

300 करोड़ का टर्न ओवर, 500 कारखाने, फिर भी टैक्सटाइल्स पार्क कागजों में कैद

3 min read
Google source verification
Textile Park In Bhilwara: भीलवाड़ा को टेक्सटाइल पार्क के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत

Textile Park In Bhilwara: भीलवाड़ा को टेक्सटाइल पार्क के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत

ज्ञानी रजक@जबलपुर। शहर विकास से जुड़ी योजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं। इसका अंदाजा इंदिरा गांधी टेक्सटाइल्स पार्क का हाल देखकर भी लगाया जा सकता है। तीन साल पहले भटौली में करीब 50 हेक्टेयर में बड़े निवेश और हजारों हाथों को रोजगार देने के लिए बनाई यह योजना कागजों तक सिमटकर रह गई है। इसे अमलीजामा अभी तक नहीं पहनाया गया। जिला प्रशासन अब तक पार्क के लिए जगह का हस्तांतरण नहीं कर सका। एमपीआइडीसी के जिम्मेदार भी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं।

तीन साल में जमीन तक नहीं मिली, प्रशासन और एमपीआइडीसी के बीच फंसा मामला
कागजों में रह गया हजारों रोजगार की उम्मीद जगाने वाला टेक्सटाइल्स पार्क

500 से ज्यादा जिले में
गारमेंट के कारखाने
300 करोड़ से ज्यादा
का वार्षिक टर्नओवर
80 फीसदी कच्चा कपड़ा
आता है गुजरात से


शहर में 16 फरवरी 2019 को पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, तब भटौली गांव के पास टेक्सटाइल्स पार्क बनाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की थी। सरकार बदलने के साथ ही योजना कागजों में ही रुक गई है। फिलहाल भूमि हस्तांतरण के लिए मप्र इंडस्ट्रीयल डेवपलमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) की फाइल प्रशासन के पास है। जिस जगह पर योजना प्रस्तावित है, उसका स्थल निरीक्षण किया जा चुका है।

गारमेंट इंडस्ट्री के लिए लाभदायक
रेडीमेड गारमेंट में जबलपुर की अलग पहचान है। यहां का सलवार सूट दक्षिण भारत व अन्य राज्यों में सप्लाई होता है। 500 से ज्यादा छोटे एवं बड़े कारखाने यहां चलते हैं। इनमें 25 से 30 हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इसी तरह रेडीमेड गार्मेंट क्लस्टर भी स्थापित हो चुका है। इस कारोबार की सबसे बड़ी जरूरत कच्चे कपड़े की होती है जो गुजरात से आता है। इसी प्रकार कुछ अन्य राज्यों से भी इसकी सप्लाई होती है। यदि टेक्सटाइल्स पार्क बनता है, तो इस उद्योग की कच्चे कपड़े की जरूरतें यहीं से पूरी हो सकेंगी।

हजारों को मिलता रोजगार, भटौली में जमीन प्रस्तावित
इस काम के लिए एमपीआइडीसी को डेवलपमेंट एजेंसी के तौर पर अधिकृत किया गया था। यह एजेंसी तभी काम करेगी जब उसके नाम पर जमीन हस्तांतरित हो जाए। भटौली में करीब 50 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित जगह पर चिन्हित की गई थी। इस जमीन को डेवलप कर यहां आने वाली औद्योगिक इकाइयों को आवंटित करने की योजना थी। इसमें करोड़ों रुपए का निवेश आता। शहर व आसपास के इलाकों के हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता।

ये सुविधाएं मिलती पार्क में
पार्क की कोई रूपरेखा तो सामने नहीं आई थी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कपड़ा उद्योग से जुड़ी सुविधाएं एक ही जगह स्थापित की जाती हैं। इसका उद्देश्य एक ही जगह कपड़े का उत्पादन और विपणन (मार्केटिंग) की व्यवस्था करनी होती है। इसमें बुनियादी साझा सुविधाओं के अलावा अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रयोगशाला होती है। इसमें धागे से कपड़ा तैयार करने, कपड़ों की रंगाई, सिलाई से लेकर पैकिंग और परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर लोगों की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय बजट में सात पार्क
केंद्र सरकार ने पिछले साल के बजट में देशभर में सात जगह मेगा टेक्टाइल्स पार्क की घोषणा की थी। इसमें उम्मीद जताई जा रही थी कि इसका लाभ जबलपुर को मिल सकेगा।


उच्च अधिकारियों को देंगे जानकारी
टेक्सटाइल्स पार्क की भूमि आवंटन की दिशा में कार्रवाई चल रही है। प्रस्तावित स्थल की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। जल्द ही योजना के सम्बंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
- राजेश बाथम, अपर कलेक्टर

पत्र भेजा है
भूमि के हस्तांतरण के लिए जिला प्रशासन को पूर्व में पत्र भेजा गया था। जैसे ही विभाग को भूमि हस्तांतरित होती है, प्रस्तावित स्थल पर विकास काम शुरू कर दिया जाएगा।
- सीएस धुर्वे, कार्यकारी संचालक, एमपीआइडीसी