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बाहर भी खाइए, सेहत भी बनाइए वाला सूत्र वाक्य काम ना आया, 5 स्टार होटलों में रंग नहीं जमा पाया श्री अन्न

ईट टू राइट चैलेंज में जबलपुर 27वें पायदान पर, रीवा, उज्जैन, सागर से भी पिछड़ा    

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प्रदेश के प्रमुख शहरों की रैकिंग
-2 भोपाल,193 अंक,
-5 ग्वलियर, 188 अंक,
-8 उज्जैन,175 अंक,
-18 रीवा, 166 अंक,
-23 इंदौर, 162 अंक,
-25 सागर, 156 अंक,
-26 दमोह, 155 अंक,
-27 जबलपुर,155 अंक,
-200 कुल अंक की थी स्पर्धा
-260 शहर देशभर के स्पर्धा में थे शामिल

जबलपुर। बाहर भी खाइए, सेहत भी बनाइए सूत्र वाक्य के साथ शहर के 4 और 5 स्टार होटलों में श्री अन्न (सुपर फूड मिलेट्स) से तैयार स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन परोसे गए। लोगों को स्वच्छ और साफ-सुथरा खाना मुहैया कराने के लिए खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने यह युक्ति अपनाई। होटल-रेस्टोरेंट, शादी-पार्टी में बचा खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाने की मुहिम चलाई गई। लेकिन, राइट टू ईट चैलेंज में जबलपुर प्रदेश के रीवा, सागर, दमोह से भी पिछड़ गया। देश के 260 शहरों के बीच हुए मुकाबले में शहर को 27वीं रैंक मिली।

खाना बचाने की मुहिम भी नहीं आई काम
केंद्रीय शासन के राइट टू ईट चैलेंज के तहत शहर में खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने एक आहार सबका अधिकार, वाय वेस्ट लेट्स डोनेट जैसी मुहिम भी चलाई थी। इसके माध्यम से होटल, रेस्टोरेंट व शादी-पार्टी के आयोजनों के दौरान संदेश दिया गया कि बचा खाना खराब न होने दें, उसे जरूरतमंदों को उपलब्ध कराएं।

ऐसे समझें राइट टू ईट चैलेंज
स्वच्छता रैंकिंग की तर्ज पर राइट टू ईट चैलेंज स्पर्धा का आयोजन होता है। इसमें देशभर के चिन्हित शहर प्रतिभागी होते हैं। स्पर्धा का उद्देश्य लोगों को स्वच्छ और साफ-सुथरा खाना मुहैया कराना होता है। इसके लिए मुहिम संचालित करने से लेकर निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग को सौंपी गई है।

मोबाइल वैन में जांच
मिलावटी खाद्य पदार्थ की जांच करने के लिए मोबाइल वैन चलाई जाती है। इसमें खाद्य सामग्री की जांच के साथ ही रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है। आम आदमी भी 10 रुपए शुल्क जमा कर खाद्य सामग्री की जांच करा सकते हैं।

इन बिंदुओं पर जांच
-होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी, खाद्य सामग्री के रिटेल कारोबारी के रजिस्ट्रेशन बढ़ाने पर मिलते हैं नम्बर
-लाइसेंसिंग, निगरानी, खाद्य सामग्री के सैम्पल लेने की गतिविधियां भी स्पर्धा में शामिल
-उपभोक्ताओं में स्वच्छ और सुरक्षित खाने के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं
-दूध, मावा, घी आदि दुग्ध उत्पाद, मिर्च-मसाले, विभिन्न खाद्य तेल, अखाद्य कलर के टेस्ट किए जाते हैं