
madanmahal kila
जबलपुर. देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इन अवसर पर बलिदानियों की धरा जबलपुर अंचल के भी रणबांकुरों का स्मरण किया जा रहा है। उनके बनाए किले, महल सहित कई ऐतिहासिक निशानियां उनकी याद दिलाती हैं। पुरातत्व के जबलपुर सर्किल के अंतर्गत ऐसा ही प्राचीन वैभव जगह-जगह बिखरा है। गोंडवाना की वीरांगना रानी दुर्गावती की गौरवगाथा कहता मदन महल का किला हो या सिंगौरगढ़ दुर्ग। राजवंशों की बुलंदी को बताता धामोली और खिमलसा का किला, अब बेकदरी की मार झेल रहा है। दरअसल, विभागीय खींचतान के बीच धरोहरों का वजूद संकट में है। रखरखाव के अभाव में किलों की दीवारें ढह रही हैं। उन तक पहुंचने के लिए एप्रोच मार्ग तक नहीं हैं। कुछ के आसपास की जमीन पर अतिक्रमण हो गया। सर्किल में 21 से अधिक महल और किले खंडहर व जर्जर हालत में हैं। पुरातत्वविदों का कहना है कि किलों के संरक्षण के लिए प्रदेश स्तरीय समन्वय समिति बनाकर विभागों के बीच का विवाद तत्काल सुलझाया जाए।
विगत दिनों विश्व धरोहर सप्ताह मनाया गया, लेकिन संरक्षण और कब्जे हटाने के सामूहिक प्रयास नहीं हुए। जबलपुर में मदन महल किला पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। आसपास का क्षेत्र वन और राजस्व विभाग के अधीन है। यहां निजी को छोडकऱ राजस्व की जमीन के काफी हिस्से में कब्जे हो चुके हैं। जानकारों के अनुसार आजादी के पहले के दस्तावेज बनाकर भी कब्जे की कोशिश होने लगी है। एक किला और पुराना मंदिर पिपरवाड़ा बालाघाट के वन ग्राम में स्थित है। संरक्षण के अभाव में पत्थरों से बना यह किला खंडहर हो गया।
मदन महल किले की स्थिति
- 306 हेक्टेयर में मदन मदल पहाड़ी
- 0.065 हेक्टेयर एरिया पुरातत्व विभाग का संरक्षित
- 116 हेक्टेयर जमीन वन विभाग के अधीन
ये हैं हमारी अनूठी विरासत
पुरातत्वविदों के मुताबिक छिंदवाड़ा जिले में देवगढ़ का गोंड किला ऊंची पहाड़ी पर वायु दुर्ग की श्रेणी में आता है। यह स्थापत्य कला का अनूठा नूमना है। यह 15-16वीं शताब्दी में बना था। रंग महल किला हट्टा दमोह जिले में है। सन् 804 में बने रंगमहल परिसर में कुछ इमारतें अब खंडहर अवस्था में हैं। हट्टा में ही जटाशंकर के प्रसिद्ध किले सागर को राजा शाहगढ़ के राजस्व अधिकारी फतेसिंह ने 1643 में बनवाया था। दमोह जिले के मढिय़ाडोह में भग्न अवस्था में गीष्मकालीन किला महल स्थित है। यह मराठा शैली का अद्भुत नमूना है। दमोह जिले में रानी दुर्गावती के समय का एक महत्वपूर्ण सिंगौरगढ़ का किला मध्यप्रदेश के प्रमुख किलों में से एक है। पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां का दौरा भी किया था। बालाघाट जिले के लांजी में कलचुरी काल का प्रसिद्ध किला है। यह खंडहर हो चुका है। बालाघाट जिले में ही गोंडकालीन पुराना किला है। इसमें 53 पाषाण प्रतिमाएं स्थापित हैं। अब यहां किले के अवशेष भी नहीं बचे।
इन्हें संवारने की दरकार
मदन महल का किला : जबलपुर
गोंड किला देवगढ़ : छिदवाड़ा
रंगमहल हट्टा : दमोह
जटाशंकर किला हट्टा : दमोह
पुराना किला लांजी : बालाघाट
राजनगर किला : दमोह
सिंगौरगढ़ का किला- दमोह
मंडला का सतखंडा शाहबुर्ज किला
अजयगढ़ किला और उसके अवशेष : पन्ना
देवरी का किला : सागर
धामोनी किला एवं रानी महल : सागर
गौड़झामर का किला : सागर
खिमलासा का किला : सागर
राहतगढ़ का किला : सागर
बेगम महल रामनगर : मंडला
दल-बादल महल चौगान रामनगर : मंडला
गढ़ी का किला बैहर : बालाघाट
गढ़ पहरा का किला : सागर
-ज्यादातर पुरातात्विक वाले स्थल नगर निगम सीमा क्षेत्र में हैं। यदि पुरातत्व से जुड़ी धरोहरों के संरक्षण को लेकर विभाग कोई कार्य करता है, तो हम उसकी अनुमति देते हैं।
-अंजना सुचिता तिर्की, वन मंडल अधिकारी
- किलों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभागों में समन्वय से इनमें गति लाई जा सकेगी। इसके लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति होनी चाहिए। ताकि, समय रहते उचित निर्णय कर इन्हें संरक्षित किया जा सके।
डॉ. शिवाकांत वाजपेयी, अधीक्षण, पुरातत्वविद, जबलपुर सर्किल
Updated on:
09 Dec 2021 11:55 am
Published on:
09 Dec 2021 01:10 am
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