जबलपुर। अब तक आपने एक से बढ़कर एक खूबसूरत मछलियों के बारे में पढ़ा और उन्हें देखा होगा। लेकिन मच्छरों की दुश्मन कही जाने वाली गंबूसिया मछली के बारे में रोचक फैक्ट शायद ही जानते होंगे। इसका उपयोग ज्यादातर मच्छरों को नष्ट करने के लिए ही किया जाता है। और ये दूसरी मछलियों की तुलना में नाले के पानी में भी जीवित रह लेती हैं।
मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण करने के लिए मलेरिया विभाग लार्वा खाने वाली गम्बूसिया मछलियों का सहारा लेगा। सिवनी जिले से डेढ़ लाख मछलियां मंगाई जा रही हैं। इन्हें ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों के जलस्रोतों में छोड़ा जाएगा। यहां हम आपको गंबूसिया की खासियत बताने जा रहे हैं...
-स्थानीय भाषा में इसे गटर गप्पी कहते हैं। इस मछली को लोग कहीं भी किसी भी प्रकार के तालाब, गड्ढे, नाली या गटर में डाल सकते हैं, जो मच्छर के लार्वा को खा जाएगी।
- इस मछली का मुख्य भोजन मच्छरों का लार्वा है।
-इस मछली की सबसे खास बात ये है कि यह अंडे नहीं देती, बल्कि बच्चे देती है। ये मछली तीन इंच तक लंबी होती है।
-इस मछली के बच्चे दो mm होने पर भी मच्छरों के लार्वा को खाने लगते हैं।
-गप्पी मछली 16 से 28 दिनों के अंतराल पर बच्चे देती है। और 14 डिग्री सेल्सियस से 38 डिग्री तक बहुत ही आराम से रह जाती है।
-गप्पी का बच्चा हो या बड़ी मछली ये अपने कुल भार का 40 फीसदी लार्वा 12 घंटे में खा सकती है।
-इस मछली की पहचान ब्रिटिश नाविक जेम्स कुक ने की थी। कुक का जन्म 7 नवंबर 1728 को इग्लैंड के एक गांव में हुआ था।
-कुक युवा काल में रॉयल ब्रिटिश नेवी में नौकरी की। यात्रा और भौगोलिक परिस्थियों के कारण अधिकतर जगहों पर मच्छरों का प्रकोप रहता था। इस समस्या का हल कुक ने गप्पी मछली से किया।