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पानी के लिए साल भर व्रत रखता है यह पक्षी, पीता है सिर्फ स्वाति नक्षत्र का पानी

अनूठा है यह पक्षी नहीं पीता तालाब, नदियों व सरोवरों का पानी, प्यास बुझाने करता है मानसून का इंतजार

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Ajay Khare

Jun 27, 2016

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अजय खरे@ जबलपुर। भारतीय हिंदू महिलाएं साल में एक दिन निर्जला व्रत रखती हैं पर क्या आपने किसी ऐसे पक्षी के बारे में सुना है जो पानी के लिए व्रत रखता है। हम बता रहे हैं आपको ऐसे ही एक पक्षी के बारे में जिसके बारे में कहा जाता है कि वह साल भर पानी के लिए व्रत रखता है और सिर्फ स्वाति नक्षत्र में बरसने वाले पानी से ही अपनी प्यास बुझाता है। अगर यह नक्षत्र बिन बरसे चला जाए तो यह पक्षी साल भर बिना पानी पीये रहता है। ऐसा कठिन व्रत रखने वाले उस पक्षी का नाम है चातक।

करीब सवा फीट लंबा काले सफेद रंग का यह पक्षी विश्व के सभी गरम देशों में पाया जाता है। कोयल की तरह भी यह अपना घोसला नहीं बनाता बल्कि दूसरी चिडिय़ों के घोसलों में अपना अंडा रख देता है। जिनसे समय आने पर बच्चे निकल कर उड़ जाते हैं। इसका भोजन कीड़े, मकोड़े और इल्लियां हैं। चातक के ही कुल का एक और पक्षी है पपीहा जिसके बारे में भी यह कहा जाता है कि वह भी केवल स्वाति नक्षत्र में ही बारिश के पानी से अपनी प्यास बुझाता है।

बरसात के मौसम में कोयल की कूक के साथ ही'पी कहां, पी कहांÓ जैसी आवाज करने वाला यह पक्षी और कोई नहीं, पपीहा ही होता है। माना जाता है कि यह इस तरह की आवाज कर अपने प्रियतम को बुलाता है। एक तरह से यह मानसूनी बारिश आने का संकेत देता है। भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश व श्रीलंका में पाए जाने वाले इस पक्षी की आवाज कोयल से भी ज्यादा सुरीली मानी गई है।


देखने में यह कबूतर जैसा होता है, इसकी आंखें पीली और शरीर का ऊपरी हिस्सा हल्के-भूरे रंग का होता है। इसकी चोंच और पैर पीले रंग के होते हैं, जिसमें थोड़ा हरापन लिए हल्के-हल्के धब्बे होते हैं। दूर से देखने पर यह चील या शिकारा पक्षी जैसा लगता है। अंग्रेजी में इसे कॉमन हॉक कुक्कू कहते हैं।

यह हरे-भरे क्षेत्र या घने जंगलों में पाया जाता है। यह वृक्षों पर रहने वाला पक्षी मस्ती में वृक्ष की चोटी पर बैठ कर जोर से टेर लगाता रहता है। रात में, खास तौर पर चांदनी रात में इसकी मस्ती भरी टेर गूंजती है। रात भर चिल्लाने के कारण पपीहे को मस्तिष्क ज्वर पक्षी (ब्रेन फीवर बर्ड) भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह पक्षी बारिश के दौरान आसमान की ओर मुंह करके पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं।

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