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थॉयराइड में लाभकारी हैं यह आयुर्वेदिक उपचार

कचनार, हरी धनिया की चटनी, साबुत मूंग,प्याज,ब्राहमी, गुग्गूल, शिलाजीत के उपयोग से इस बीमारी से मिलती है निजात

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Ajay Khare

Oct 20, 2016

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जबलपुर। अत्यधिक तनाव और अन्य कारणों से देश में थॉयराइड के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। जबलपुर में भी इसके मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है यही वजह है कि इसकी जांच करने वाली देश की नामी पैथोलॉजी लैब चलाने वाली कंपनियों ने यहां अपनी लैब स्थापित कर दी हैं। हम आपको बता रहे हैं इस बीमारी के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जिससे थॉयराइड पीडि़त व्यक्ति धीरे-धीरे इस बीमारी से निजात पा सकता है।

क्या है बीमारी का कारण
गले में स्थित थॉयराइड गं्रथि से निकलने वाले थॉयराक्सिन हार्माेन का काम शरीर की मेटाबॉलिज्म क्रियाओं को नियंत्रित करना है। जब किसी कारण से यह हार्माेन निर्धारित मात्रा से कम या ज्यादा स्रावित होने लगता है तो हायपोथायरॉडिज्म और हाइपरथॉयराइडिज्म नाम की बीमारी सामने आती है। हायपोथायरॉडिज्म में कम और हाइपरथॉयराइडिज्म में जरूरत से ज्यादा मात्रा में थॉयराक्सिन हार्माेन का स्राव होने लगता है। जिससे शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं।


यह हैं रोग के लक्षण
हाइपरथॉयराइडिज्म में व्यक्ति के शरीर में कंपन, चिड़चिड़ापन, घबराहट दस्त , गर्मी का अधिक लगना, मासिक धर्म में अनियमितता और कभी-कभार आँखों की पुतलियों का बाहर निकलना जैसे लक्षण होते हैं ऐसा व्यक्ति स्वयं को शक्तिहीन महसूस करता है और चिड़चिड़ा हो जाता है।.हायपोथायरॉडिज्म में रोगी के शरीर में प्राय: अप्रत्याशित रूप से थकावट, कमज़ोरी आँखों व त्वचा और शरीर के कई अंगों में सूजन शरीर के तापमान का कम रहना, हृदय की धड़कन का कम होना, भूख का कम लगना, कब्ज और रक्ताल्पता के लक्षण देखने को मिलते हैं।

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यह है उपचार
महर्षि चरक के अनुसार थायरॉइड का रोग अधिक मात्रा में दूध पीने वालों को नही होता इसके अलावा साबुत मूँग, पुराने चावल, जौ, सफेद चने, खीरा, गन्ने का जूस और दुग्ध पदार्थों का सेवन करना भी अत्यंत आवश्यक है। कचनार का प्रयोग इस ग्रंथि के अच्छी प्रकार से सक्रिय रहने के लिए आवश्यक है. इसके अलावा , ब्राह्मी, गुग्गूल, शिलाजीत भी लाभदायक है। गोक्शुर और पुनर्नवा भी इस रोग में फायदेमंद हैं। 11 से 22 ग्राम जलकुंभी का पेस्ट बनाकर थायरॉइड के क्षेत्र में लगाने से इस स्थिति में लाभ मिलता है. यह आयोडीन की कमी को पूरा करता है। नारियल तेल में पाए जाने वाले फैटी एसिडस से बहुत से लाभ मिलते हैं। यह शरीर के अंगों, मस्तिष्क को विशिष्ट लाभ प्रदान करने में सहायक है. और यह हायपोथायरॉडिज्म नामक रोग को ठीक करने में सहायक है. हरे पत्ते वाले धनिये की ताजा चटनी बना कर एक बडा चम्मच एक गिलास पानी में घोल कर रोज पीएं । सादा सुपाच्य भोजन,म_ा,दही,नारियल का पानी,मौसमी फल, ताजी हरी साग सब्जियां, अंकुरित गेंहूँ, चोकर सहित आटे की रोटी को अपने भोजन में शामिल करें।

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ये परहेज करें
मिर्च-मसाला,तेल,अधिक नमक, चीनी, खटाई, चावल, मैदा, चाय, काफी, नशीली वस्तुओं, तली-भुनी चीजों, रबड़ी,मलाई, मांस, अंडा जैसे खाद्यों से परहेज रखें। अगर आप समुद्री नमक खाते है तो उसे तुरन्त बंद कर दें और सैंधा नमक ही खाने में प्रयोग करें।
इनका कहना है
थॉयराइड पीडि़तों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। आयुर्वेद में कचनार के उपयोग से इस बीमारी को दूर करने में सफलता मिली है। इसके अलावा अन्य औषधियां भी रोग निवारण में प्रभावी हैं।
डॉ.महेश बुखारिया,आयुर्वेद चिकित्सक