महर्षि चरक के अनुसार थायरॉइड का रोग अधिक मात्रा में दूध पीने वालों को नही होता इसके अलावा साबुत मूँग, पुराने चावल, जौ, सफेद चने, खीरा, गन्ने का जूस और दुग्ध पदार्थों का सेवन करना भी अत्यंत आवश्यक है। कचनार का प्रयोग इस ग्रंथि के अच्छी प्रकार से सक्रिय रहने के लिए आवश्यक है. इसके अलावा , ब्राह्मी, गुग्गूल, शिलाजीत भी लाभदायक है। गोक्शुर और पुनर्नवा भी इस रोग में फायदेमंद हैं। 11 से 22 ग्राम जलकुंभी का पेस्ट बनाकर थायरॉइड के क्षेत्र में लगाने से इस स्थिति में लाभ मिलता है. यह आयोडीन की कमी को पूरा करता है। नारियल तेल में पाए जाने वाले फैटी एसिडस से बहुत से लाभ मिलते हैं। यह शरीर के अंगों, मस्तिष्क को विशिष्ट लाभ प्रदान करने में सहायक है. और यह हायपोथायरॉडिज्म नामक रोग को ठीक करने में सहायक है. हरे पत्ते वाले धनिये की ताजा चटनी बना कर एक बडा चम्मच एक गिलास पानी में घोल कर रोज पीएं । सादा सुपाच्य भोजन,म_ा,दही,नारियल का पानी,मौसमी फल, ताजी हरी साग सब्जियां, अंकुरित गेंहूँ, चोकर सहित आटे की रोटी को अपने भोजन में शामिल करें।