
tilak tradition trends in india
जबलपुर. पूजा-पाठ में भी समय के साथ बड़ा बदलाव सामने आया है। धर्म के प्रति युवा पीढ़ी की आस्था बढ़ी है। साथ ही तिलक लगाने के प्रति युवाओं की झिझक खत्म हुई है और ललाट पर तिलक-त्रिपुंड लगाने का प्रचलन बढ़ा है। संस्कारधानी में भी बडी संख्या में युवाओं के ललाट पर तिलक देखा जा सकता है। मंदिरों से बाहर निकलते हुए युवा त्रिपुंड व तिलक लगाकर निकलते हैं। विद्वान भी मानते हैं कि यह शुभ संकेत हैं। धर्म के प्रति यही आस्था प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा। परिवार में संस्कारों का जन्म होगा और समाज में भी अच्छे वातावरण बनेंगे। धर्म के प्रति बढ़ती आस्था व कथावाचकों के उपदेशों के चलते युवा वर्ग हर दिन अलग तिलक लगा रहे हैं। धर्माचार्यों के अनुसार सप्ताह के सातों दिन अलग अलग तिलक लगाए जाते हैं।
त्रिपुंड व तिलक के प्रति बढ़ रुझान : दिन के अनुसार भी लगा रहे
12 स्थानों पर तिलक
ज्यादातर लोग केवल माथे पर ही तिलक लगाते हैं। धर्माचार्य उदय कृष्ण शास्त्री का कहना है कि हिन्दू परम्परा में सिर, मस्तक, गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल 12 स्थानों पर तिलक लगाने का विधान बताया गया है। युवा वर्ग मस्तक, गले , हृदय व बाजू में तिलक लगाना पसंद कर रहे हैं।
हर उंगली का महत्व
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला कहते हैं कि तिलक किसी भी उंगली या अंगूठे से लगाया जा सकता है। मुख्य रूप से अनामिका उंगली का इस्तेमाल तिलक लगाने के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ने के लिए अंगूठे से तिलक लगाना शुभ होता है। किसी युद्ध में विजय प्राप्त करने सुर शत्रु का नाश करने के लिए तर्जनी उंगली से तिलक करना शुभ माना जाता है। धन प्राप्ति के लिए तिलक लगाने में मध्यमा उंगली का इस्तेमाल किया जाता है। दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली से पितृगणों को अर्थात पिंड को तिलक किया जाता है। वहीं दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली से स्वयं तिलक लगाया जाता है। दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली से भगवान व देवों का तिलक किया जाता है, जबकि दाहिने हाथ के अंगूठे से अतिथि को तिलक किया जाता है।
त्रिपुंड प्रिय
युवाओं को त्रिपुंड लगाना भा रहा है। गढ़ा के पंकज पांडे कहते हैं कि शिव पूजन के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ा है। इसके चलते युवा त्रिपुंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आजकल इसके लिए सांचे भी आ रहे हैं।
इस दिन ये तिलक
सोमवार- सफेद चंदन, विभूति या भस्म का तिलक
मंगलवार - लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर
बुधवार - सूखे सिंदूर का तिलक
गुरुवार - सफेद चंदन घिसकर उसमें केसर मिला तिलक
शुक्रवार - लाल चंदन, सिंदूर का तिलक
शनिवार - विभूती, भस्म या लाल चंदन का तिलक
रविवार- लाल चंदन या रोली का तिलक
Published on:
18 Dec 2022 01:03 pm
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