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गुजरे जमाने का हो गया ट्रैफिक वार्डन एप

29 जनवरी को हुआ था लॉन्च, निगम और ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में इस एप के माध्यम से शहरवासियों की मदद से चौराहे व तिराहे का ट्रैफिक नियंत्रित करना था

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reetesh pyasi

Sep 19, 2016

  traffic warden

traffic warden

जबलपुर। ट्रैफिक सिस्टम को कोसने वालों के लिए नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक वार्डन एप के माध्यम से चौराहों-तिराहों को दो घंटे तक नियंत्रित करने का अवसर दिया था, लेकिन आठ महीने में ही शहरवासियों के साथ एप विकसित करने वाले जिम्मेदारों ने भी इसे भुला दिया। ट्रैफिक वार्डन एप को सीएम ने 29 जनवरी को लांच किया था। निगम और ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में इस एप के माध्यम से शहरवासियों की मदद से चौराहे व तिराहे का ट्रैफिक नियंत्रित करना था। 18 से 50 वर्ष के बीच का कोई भी शहरवासी एप के माध्यम से पहले रजिस्ट्रेशन कराना था। उसके बाद उसे प्रशिक्षण दिया जाता था।

शहर के 48 चौराहों को एप से जोड़ा गया था। इसमें से किसी भी एक चौराहे पर दिन व दो घंटे के टाइम स्लॉट के अनुसार पहुंच कर ट्रैफिक को नियंत्रित करना होता था। मानस भवन में ट्रैफिक की ओर से 15 दिन तक लगातार प्रशिक्षण भी दिया गया था। कुछ चौराहों पर शुरुआती समय में लोगों ने ट्रैफिक भी सम्भाला थी, लेकिन इसके बाद लोगों ने इसे भुला दिया। अधिकारियों ने भी इसका प्रचार-प्रसार और लोगों को जागरूक नहीं किया। गूगल से इस एप को महज 1000 लोगों ने ही अब तक डाउनलोड किया है।

ट्रैफिक वार्डन एप अब भी अमल है। शहर के लोगों को ही सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में दिलचस्पी नहीं है। फिर भी लोगों को एक बार और प्रेरित करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
देवेंद्र प्रताप सिंह, ट्रैफिक , एएसपी

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