
mp election 2023
एसपी विद्यार्थी महज सात महीने ही जबलपुर में रह पाए। इसी साल मार्च में उनकी सिद्धार्थ बहुगुणा की जगह पदस्थापना की गई थी। इससे पहले वे जबलपुर में एएसपी रह चुके थे। इसलिए जमने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। लेकिन चुनाव ने उनकी पारी की गिल्लियां उड़ा दीं। हालांकि वे कई महीने से चुनावी तैयारी में लगे हुए थे।
इसके लिए विशेष अभियान चलाकर वारंटों की तामीली कराई गई और हाका अभियान चलाया गया। चिन्हित अपराधियों पर नकेल कसने के लिए रिकॉर्ड 14 हजार बांड ओवर किए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर इससे पहले जबलपुर में कार्रवाई नहीं हुई थी। एसपी विद्यार्थी का संक्षिप्त कार्यकाल कई उपलब्धियों को लिए था, प्रदेश की सबसे बड़ी गांजा तस्करी उन्हीं के कार्यकाल में पकड़ी गई। अपराधों के निपटारे में जबलपुर की रैंकिंग सुधरी थी।
आयोग ने पहले चेताया था
अब जो खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक उनका परफार्मेंस ही उनके गले की फांस बन गया। बताया जाता है कि चुनाव आयोग के हाईप्रोफाइल दौरे के दौरान कलेक्टर व एसपी की जो बैठकें हुईं थीं, उसमें जो प्रजेंटेशन दिया गया था, वह कमजोर पाया गया। इस पर आयोग के पदाधिकारियों ने ऐतराज जताते हुए सुधार के निर्देश दिए थे। लेकिन आयुक्त को खटका बना हुआ था। उसी के चलते मामला उलटा पड़ गया।
हर तरफ एक ही सवाल, किसने शिकायत की
एसपी के औचक तबादला आदेश ने सभी को हैरान कर दिया। यहां तक कि राजनीतिक दल के नेता भी नहीं समझ पा रहे थे कि अचानक विकेट कैसे उखड़ गया। रातभर इसी की खोजबीन चलती रही कि आखिर पुलिस कप्तान की शिकायत किसने की। कई लोगों ने कांग्रेस नेताओं से भी संपर्क साधकर जानने की कोशिश की कि आखिर यह सब कैसे हुआ। पर इतने ही अनजान कांग्रेस के नेता भी निकले।
Published on:
12 Oct 2023 07:51 am
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