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OMG : बेरहमी से काट डाले दो लाख पेड़

प्रदेश में घट गई 6000 हेक्टेयर वन भूमि, सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जबलपुर में चली सबसे ज्यादा आरी

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Abhishek Dixit

Apr 17, 2016

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जबलपुर। प्रदेश में नई सड़कों के निर्माण, विस्तार और चौड़ीकरण के लिए पांच साल में पौने दो लाख से ज्यादा पेड़ काटने पड़े। इस मामले में अन्य जिलों के मुकाबले जबलपुर सबसे आगे है। यहां सबसे ज्यादा 40145 पेड़ काटे गए हैं। इन पेड़ों की भरपाई के नाम पर केवल 10 फीसदी ही पौधरोपण किया गया। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से जहां पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है, वहीं दो साल में प्रदेश की वनभूमि छह हजार हेक्टेयर (60 वर्ग किमी) घट गई। यह पूरा खुलासा आरटीआई से निकाली गई जानकारी में हुआ है।

स्टेट हाईवे के लिए सबसे ज्यादा
प्रदेश में पांच साल में नेशनल हाईवे के मुकाबले स्टेट हाईवे के लिए ज्यादा पेड़ काटे गए। नेशनल हाईवे 7,37,42,12 व 43 के विस्तार, चौड़ीकरण व नई सड़क के निर्माण के लिए 48205 पेड़ काटे गए हैं। जबकि, स्टेट हाईवे 2, 10, 11, 15, 17, 18, 20, 23, 26, 27, 42, 43, 49, 50 व 59 के लिए एक लाख 33 हजार 417 सागौन, आम, जामुन, पीपल, बरगद, बबूल आदि के पेड़ काटे गए हैं।

वन विभाग भी निशाने पर
प्रदेश में सड़कों के नाम पर तो पेड़ों को काटा ही गया, दूसरी ओर वन विभाग व वन विकास निगम भी अंधाधुंध पेड़ों की कटाई में जुटा है। पेड़ों की कटाई का सिलसिला तीन साल में तेजी से बढ़ा है। अकेले खंडवा जिले के 22399.79 हेक्टेयर वन क्षेत्र में लगभग एक लाख 46 हजार 715 वृक्ष काटे गए हैं। भोपाल जिले में भी 60 हजार से अधिक पेड़ों को काट दिया गया है।


निगम ने काटे 2670 पेड़
जबलपुर नगर निगम से आरटीआई से ली गई जानकारी में पांच साल में 2670 पेड़ काटे जाने की जानकारी दी गई है। इन पेड़ों को काटे जाने के बदले 10 प्रतिशत पौधों का रोपण नहीं किया गया। जबलपुर शहरी क्षेत्र में पौधरोपण नीति के तहत 1.5 लाख पेड़ लगाए जाने थे, लेकिन केवल 10 हजार ही लगाकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रदेश के अन्य नगर निगम, नगर निकायों ने भी अपने अधिकार क्षेत्र में सड़कों के निर्माण, विस्तारीकरण के लिए भारी संख्या में पेड़ों की कटाई की है।

एनजीटी में दायर होगी याचिका
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के युवा प्रकोष्ठ के सम्भागाध्यक्ष मनीष शर्मा ने बताया कि ये आंकड़े नेशनल हाईवे व मप्र रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन भोपाल से आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किए गए हैं। इस मामले में मार्गदर्शक मंच का युवा प्रकोष्ठ एक सप्ताह के भीतर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल बेंच मंे जनहित याचिका दायर करेगा। मंच के राकेश चक्रवर्ती, रानी जायसवाल, नीरज पहारिया, अभय बानगात्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की पर्यावरण विरोधी नीति के कारण पर्यावरण, जीव-जन्तुओं एवं मनुष्यों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। मंच का आरोप है कि पूरे प्रदेश में पेड़ों को काटने एवं पौधरोपण के संदर्भ में निर्धारित नियम कायदों, दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से उल्लंघन हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय के आदेशों, काटे गए पेड़ों के स्थान पर 10 गुना लगाए जाना अनिवार्य है, का भी पालन नहीं किया जा रहा है।


सड़क के लिए कहां कटे कितने पेड़
शहर- काटे गए पेड़
जबलपुर- 40145
उज्जैन- 15778
इंदौर- 13305
आगर- 1808
ग्वालियर- 9760
बुरहानपुर- 1479
सागर- 1439
गुना- 1195


प्रदेश के वन परिक्षेत्र पर एक नजर
वर्ष- वन परिक्षेत्र
2014- 77522 वर्ग किमी
2015- 77462 वर्ग किमी


विकास कार्यों में काटे गए पेड़ों से ज्यादा पौधे लगाए जा रहे हैं। वन विभाग ने विधानसभा सत्र में भी इसकी जानकारी दी है। प्रदेश की संयुक्त वन प्रबन्धन समितियां भी हरियाली बढ़ाने में अच्छा योगदान कर रही है।
नरेन्द्र कुमार, पीसीसीएफ, मप्र

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