
super specialty hospital of india-mp
जबलपुर। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज की बात सुनते ही लोग नाक मुंह सिकोडऩे लगते हैं। वहां की तस्वीर लोगों को केवल गंदगी, अराजकता और डॉक्टरों की मनमर्जी जैसी बनी हुई है। जबकि आज की बात करें तो यहां ऐसे ऐसे इलाज मौजूद हैं। जो निजी अस्पतालों में भी नहीं है। इन अस्पतालों में जो ऑपरेशन मुफ्त में हो रहे हैं, उसके लिए निजी अस्पताल कई बार लोगों को घर तक बिकवा देते हैं। सरकारी अस्पतालों की नई छवि अब सामने आने लगी है। जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसे ही ऑपरेशन व इलाज हो रहे हैं। यहां के डॉक्टर अब असंभव से लगने वाले ऑपरेशन को बड़ी आसानी से कर रहे हैं। जिसकी चर्चा अमेरिका के डॉक्टरों तक हो रही है।
NEWS FACTS
न्यूरो एंडोस्कोपी कार्यशाला : दूसरे दिन हुए पांच जटिल ऑपरेशन
बिना चीरफाड़ दूरबीन पद्धति से नाक के रास्ते निकाला ब्रेन ट्यूमर
मेडिकल कॉलेज स्थित न्यूरो सर्जरी यूनिट में पांच दिवसीय न्यूरो एंडोस्कोपी के दूसरे दिन गुरुवार को पांच जटिल ऑपरेशन हुए। वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वायआर यादव और डॉ. शैलेंद्र रात्रे ने गाजीपुर (यूपी) के 45 वर्षीय मरीज के दिमाग में चार सेमी से बड़े ब्रेन ट्यूमर को चीरफाड़ के बिना दूरबीन पद्धति से नाक के रास्ते बाहर निकाला। इसके अलावा कुंडम निवासी आरती (21) के दिमाग से पांच सेमी के ब्रेन ट्यूमर को नेविगेशन (विभाग द्वारा विकसित ट्यूब्युलर रिट्रैक्टर व दूरबीन की मदद से) तकनीक से निकाला गया।
दूसरी ओटी में डॉ. रोहितास और डॉ. अमितेश दुबे ने डेस्तंदू तकनीक से तीन मरीजों के ऑपरेशन किए। फ्रांस के जीन डेस्तंदू द्वारा खोजी गई इस तकनीक से साइटिका के दर्द, लम्बार के मरीज़ों का अति सूक्ष्म चीरे से ऑपरेशन किया जाता हैं। लाइव सर्जरी के बाद विभाग द्वारा विकसित मॉडल पर न्यूरो एंडोस्कोपी की बारीकियों को बताया गया।
फेलोशिप में मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरएस शर्मा, डीन प्रो. नवनीत सक्सेना, अधीक्षक प्रो. राजेश तिवारी, सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय शर्मा, डॉ. आशीष सेठी, डॉ. गोपाल मरावी, डॉ. नीरज नारंग, डॉ. गोडविन, डॉ. मीना सिंह मौजूद रहे।
Published on:
21 Sept 2018 09:26 am
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