
untold story of creation of world
जबलपुर। सनातन संस्कृति में तीन प्रमुख देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानि भगवान शंकर को त्रिदेवों की संज्ञा दी गई है। संपूर्ण सृष्टि का संचालन ये त्रिदेव ही करते हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इस संपूर्ण सृष्टि की रचना ब्रह्माजी ने की है और इसका पालन भगवान विष्णु कर रहे हैं। भगवान शंकर को सृष्टि के संहारक के रूप में मान्य किया गया है। ये प्रलंयकारी देव हैं, उन्हें महाकाल भी कहा जाता है। हालांकि एक हकीकत और भी है। सच तो यह है कि भगवान शंकर केवल संहारक नहीं है बल्कि मूलत: वे ही सृष्टि के रचयिता ही हैं। पुराणों में इस संदर्भ में कई बातें कहीं गईं है जोकि त्रिदेवों में भगवान शंकर की अहमियत बताती हैं। उन्हें महादेव की संज्ञा भी इसलिए ही दी गई है।
शिवपुराण में है उल्लेख
शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जनार्दन शुक्ला बताते हैं कि शिवजी के संदर्भ में सबसे बड़ा और प्रामाणिक ग्रंथ शिवपुराण को माना जाता है। शिवपुराण में सृष्टि के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य वर्णित है। शिवपुराण में यह स्पष्ट बताया गया है कि भगवान शिव ने ही सबसे पहले संसार की रचना की कल्पना की थी। उन्होंने यह बात ब्रह्माजी को बताई। इस पर ब्रह्माजी ने शिवजी की इच्छा के अनुसार सृष्टि की रचना की।
शिवपूजन सबसे श्रेष्ठ
इस तरह संसार के प्रतिपालक के रूप में भी शिवजी अधिष्ठित हुए हैं। यही कारण है कि सनातन संस्कृति में शिवपूजन को सबसे श्रेष्ठ अनुष्ठान माना जाता है। हैरत की बात तो यह है कि शिवपूजन को सबसे सरल रखा गया है। शिवलिंग को मात्र जल अर्पित कर देनेपर भी यह पूजा पूर्ण मानी जाती है। सभी धार्मिक और ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि शिव पूजा से कुंडली के सभी दोष भी दूर हो सकते हैं।
मिलती है शिवकृपा
सोमवार शिवजी की पूजा के श्रेष्ठ दिन माना जाता है। इस दिन मनोयोग से शिवपूजा श्रेष्ठ फल देती है। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का नियमित जाप आपके जीवन को संवार सकता है। इससे बुरा समय दूर हो सकता है और शिवजी की कृपा मिलती है जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और परेशानियों खत्म होती हैं।
Published on:
07 May 2018 11:10 am
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