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Mahavir Jayanti:  वर्धमान ऐसे बने महावीर, जानिए पूरी कहानी

मानव समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर लाने वाले भगवान महावीर ने कठिन तप किया, इससे उन्होंने अपनी समस्त इंद्रियों पर विजय प्राप्त की, जिससे वे महावीर कहलाए

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neeraj mishra

Apr 19, 2016

mahaveer jayanti

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जबलपुर। बिहार के लच्छिवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और माता त्रिशाला को 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रियोदशी तिथि को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम उन्होंने वर्धमान रखा। कहा जाता है कि वर्धमान ने कठोर तप करके अपनी समस्त इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। इसलिए उन्हें जिन अर्थात विजेता कहा गया। उनका कठिन तप पराक्रम के समान माना गया। इसलिए उन्हें महावीर कहा गया। मंगलवार को महावीर जयंती पर सभी जिलों में भगवान महावीर की शोभयात्रा निकाली गई। इस दौरान जैन धर्मावलम्बियों ने महावीर के जयकारे भी लगाए।

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ऐसे किया पूजन
महावीर जयंती पर श्रद्धालुओं ने जैन मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति की विशेष पूजन किया। अभिषेक के बाद भगवान की मूर्ति को सिंहासन और रथ में बैठाकर शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान को फल, चावल, जल, सुगन्धित द्रव्य अर्पित किए गए। नरसिंहपुर, गाडरवारा, कटनी, सिहोरा में भी भगवान महावीर को जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया गया।

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सांसद हुए शामिल
जबलपुर में बड़े फुहारा से भगवान महावीर की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सांसद राकेश सिंह और राज्यमंत्री शरद जैन शामिल हुए। शहर के विभिन्न मार्गों से यह शोभयात्रा निकाली गई। महावीर के जयघोष के साथ बैंड की धुन पर लोगों ने महावीर को याद किया।

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यहां रथ में निकले महावीर
दमोह में भगवान महावीर की शोभयात्रा निकाली गई। रथ में बैठकर भगवान महावीर ने शहर का भ्रमण किया। इस दौरान जैन धर्मावलम्बियों ने भगवान को झूला भी झुलाया। गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालुओं ने जयघोष के नारे लगाए।

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