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Veterinary College में नया प्रयोग, अब पढ़ाई को प्रभावी बनाने स्केलेटन की रंगों के आधार से होगी पहचान

Veterinary College

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Veterinary College : वेटरनरी साइंस की पढ़ाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वीयू के चिकित्सक प्रयोग करने में जुटे हैं। जानवरों के शरीर की हड्डियों की सरंचना की पहचान करना और उन्हें याद रखना बेहद कठिन होता है। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए नवाचार किया गया है। हिरण, चीतल, कुत्ता, वाइल्ड बोर, गाय, भैंस, गोट, हार्स आदि के रंगों के आधार पर शारीरिक संरचना को समझाने का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही वेटरनरी कॉलेज में म्यूजियम तैयार किया जाएगा। इस पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

Veterinary College : वेटरनरी कॉलेज में किया जा रहा प्रयोग, म्यूजियम पर भी काम

Veterinary College : भारी जानवर और सीमित जगह

जानकारों के अनुसार वेटरनरी कॉलेज में प्रदर्शन के लिए सीमित जगह है। जबकि अध्ययन अध्यापन के लिए पशुओं का आकार उनकी शरीरिक बनावट भारी भरकम होती है। ऐसे में इनको प्रदर्शित करने और व्यविस्थत रखने के लिए बड़ी जगह की जरूरत है। इसे देखते हुए कुलपति डॉ. मनदीप शर्मा के मागदर्शन में इसका समाधान एक व्यवस्थित मिनी म्यूजियम के रूप में निकाला जा रहा है। एक स्थान पर जानवरों के अंगों, स्केलेटन आदि को व्यवस्थित किया जाएगा। यह न केवल छात्रों, बल्कि पशुपालकों, सामान्य लोगों, स्कूली बच्चों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

Veterinary College : मेडिकल की तरह चार साल की पढ़ाई

बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हस्बेंडरी का चार साल का पाठ्यक्रम मेडिकल की पढ़ाई की तरह है। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को शरीर संरचना और पशु प्रजातियों की गहरी समझ भी विकसित होती है।

Veterinary College : किसी भी तरह के एनिमल के स्कल का अध्ययन सबसे ज्यादा कठिन होता है। इसे आसान और रुचिकर बनाने के लिए सभी तरह के एनिमल के स्कल को रंगों के आधार पर अध्ययन कराया जा रहा है। इससे छात्रों की भी रुचि बढ़ी है।

  • डॉ. राखी वैश, एनाटॉमी विभाग वेटरनरी कॉलेज