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जब देश में चलाए गए थे चमड़े के सिक्के…जानिए क्यों हुआ था ऐसा

ढाई दिन के लिए बादशाह बने निजाम भिश्ती ने हुमायुं की सल्तनत में चलवा दिए थे चमड़े के सिक्के

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Ajay Khare

Nov 10, 2016

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जबलपुर। देश में 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद भारतीय मुद्रा सुर्खियों में है। हर कहीं इसकी ही चर्चा है ऐसे में हम आपको बता रहे हैं मुद्रा से संबंधित एक रोचक मामला जब देश में ढाई दिन के लिए बादशाह बने एक भिश्ती ने चमड़ा के सिक्के चलवा दिए थे।

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यह बात उस समय की है जब देश में हुमायुं का शासन था। बक्सर के मैदान में एक बार हुमायुं और शेरशाह सूरी के बीच घमासान युद्ध हुआ। युद्ध में हुमायुं को शेरशाह सूरी की सेना ने तीनों ओर से घेर लिया। हुमायुं अपनी जान बचाने के लिए युद्ध के मैदान से भागकर गंगा के किनारे पहुंचा और किसी तरह नदी पार करने का प्रयास करने लगा। उसे डर था कि यदि शत्रु सेना वहां पहुँच गई तो उसे गिरफ्तार कर लेगी। उसी समय निजाम भिश्ती अपनी मशक में पानी भरने के लिए गंगा के किनारे आया। वह बहुत अच्छा तैराक था। निजाम ने हुमायुं को मशक पर लिटाया और तैरते हुए गंगा नदी पार करा दी। इस उपकार के बदले हुमायुं ने निजाम को बहुत सारा इनाम देने का वचन दिया। जिस पर निजाम ने कहा कि यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं तो अढ़ाई दिन की बादशाहत दे दीजिए। हुमायुं ने भिश्ती की बात मान ली और राज्य में उसे अढ़ाई दिन की बादशाहत देने का ऐलान कर दिया।

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हुमायुं ने शाही कपड़े पहनवाकर भिश्ती को राजगद्दी पर बैठा दिया और दरबारियों से कहा आज से ये बादशाह हैं और इन्हीं के हुक्म का पालन किया जाए। इतना कहकर हुमायुं वहाँ से चला गया। जब हुमायुं वहां से चला गया तो निजाम बादशाह वजीर को लेकर टकसाल पहुंचा और वहां बन रहे सिक्कों पर रोक लगा दी और चमड़े के सिक्के बनाने का आदेश दिया। जिसके बाद टकसाल में दिन-रात चमड़े के सिक्के बनने लगे। जिसके बाद पूरे राज्य में चमड़े के सिक्के चलने लगे। निजाम भिश्ती ढाई दिन तक बादशाह रहा और इस दौरान चमड़े के ही सिक्के चले। बड़े-बड़े सेठों को बुलाकर उनसे चांदी व अन्य धातु के सिक्के जमा करा लिए गए और चमड़े के सिक्के दिए गए। ढाई दिन का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद निजाम भिश्ती ने शाही पोशाक उतार दी और अपनी मशक लेकर वहां से चला गया। इतिहास में इस घटना को ढाई दिन की बादशाहत के कमाल के नाम से जाना जाता है।