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जबलपुर। नवरात्र के पहले ही तंत्र-मंत्र आदि में उपयोग होने वाले जीवों की तस्करी शुरू हो गई है। तंत्र क्रिया में काम आने वाले संरक्षित दो देशी कछुए सहित दो आरोपियों को वन विभाग के कर्मचारियों ने खैरलांजी बालाघाट रेंज के अंतर्गत आने वाले पिंडकापार से पकड़ा है। तस्करों के पास से और भी वन्य जीव व कछुए मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खैरलांजी के वन अधिकारियों को मुखबिरों ने बताया कि रविन्द्र कुमार पिता पिया लाल अत्रे निवासी भंडारा और पिता घूटन लाल निवासी थानेगांव वन्य जीवों की तस्करी करते हैं, वे पिंडापार कुछ जीवों को लेकर पहुंचे हैं। इसके बाद सहायक संचालक मलाजखंड सुधीर मिश्रा, परिक्षेत्र अधिकारी समनपुर देवेश खराडी, सीताराम राजुरकर आदि ने प्लान बनाया और टीम को निर्देशित किया। इसके बाद टीम मुखबिर के बताए स्थान पर पहुंची। जहां रविन्द्र कुमार और राजेश थैले में कछुओं को भरकर खड़े हुए थे। वन विभाग के अधिकारियों को देखकर उन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे।
तलाशी लेने पर दोनों के पास से दो भारतीय किस्म के संरक्षित नरम खोल वाले कछुए बरामद किए गए। आरोपियों के अनुसार इन कछुओं को वे तांत्रिकों को देने के लिए जा रहे थे। जिन्हें नवरात्र के दौरान सिद्धि प्राप्ति की क्रिया में उपयोग किया जाना है। दोनों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। उनके पास से और भी वन्य जीवों के मिलने की संभावना है।