
नर्मदा तट
भगवान विष्णु व भोलेनाथ को प्रसन्न करने संत, विप्र व धार्मिक लोग कर रहे विशेष यज्ञ-अनुष्ठान, कथा के आयोजन
जबलपुर।
आषाढ़ मास की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना भगवान विष्णु और भोलेनाथ की आराधना के लिए उत्तम माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने में यज्ञ-अनुष्ठान का शुभफल अतिशीघ्र मिलता है। इसलिए आषाढ़ माह में सर्वाधिक यज्ञ-अनुष्ठान होते हैं। धार्मिक क्रियाओं, यज्ञ-अनुष्ठान के लिए नर्मदा तट को अति उत्तम स्थल माना जाता है। आषाढ़ की शुरुआत के साथ ही संस्कारधानी में भी यज्ञ-अनुष्ठान के आयोजन बढ़ने लगे हैं। नर्मदा के गौरीघाट, तिलवाराघाट,लम्हेटाघाट सहित अन्य घाटों में हर दिन बड़ी संख्या में यज्ञ किये जा रहे हैं। भगवान विष्णु व भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सन्तवृन्द, विप्रजन व धर्मपरायण लोग कथा, हवन कर रहे हैं।
गुप्त नवरात्र पर होगी साधना-
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में मनाया जाने वाला गुप्त नवरात्रि का पर्व इस साल 19 जून से प्रारंभ होगा। पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि 18 जून 2023 को प्रात:काल 10:06 बजे से प्रारंभ होगी और 19 मई को प्रात:काल 11:25 बजे समाप्त होगी। गुप्त नवरात्र की पूजा के लिए कलश की स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 जून सोमवार को प्रात:काल 05:23 से 07:27 बजे तक रहेगा। इसके अलावा कलश की स्थापना अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना अभिजित मुहूर्त में सुबह 11:55 से लेकर दोपहर 12:50 बजे तक की जा सकती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि में जहां शक्ति के 09 पावन स्वरूपों की पूजा का विधान है, वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के 10 दिव्य स्वरूप यानि मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की पूजा की जाती है।
शक्ति की साधना में इन सभी 10 महाविद्या की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में इन देवियों की गुप्त रूप से साधना करने पर साधक की बड़ी से बड़ी मनोकामना पलक झपकते पूरी होती है। इस वर्ष भी साधु-संत व साधक गुप्त नवरात्र पर नर्मदा किनारे व मंदिरों में देवी आराधना करेंगे।
हो रही सूर्य उपासना भी -
आषाढ़ मास में सूर्य उपासना का भी महत्व बताया गया है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ के महीने में रोजाना सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रतिदिन सूर्य पूजा करता है उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उसका सभी जगह यश बढ़ता है। आषाढ़ की शुरुआत के साथ ही नर्मदा तट पर प्रातः स्नान व सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
पुराण व कथा सुन रहे-
आषाढ़ के आरम्भ होते ही भागवत, शिवमहापुराण, विष्णु पुराण, नर्मदा महापुराण व अन्य पौराणिक कथाओं के आयोजनों में भी तेजी आई है। भागवताचार्य उदय कृष्ण शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ माह में लोग भागवत कथा वाचन के लिए अधिक बुलाते हैं। इस माह लगातार चार जगहों पर उनकी कथाएं होनी हैं। आषाढ़ के आरम्भ के साथ नर्मदा किनारे भी ऐसे आयोजनों की संख्या बढ़ी है। नर्मदा तटों पर कई जगह लोग नर्मदा महापुराण कथा सुन रहे हैं। इस माह शहर में कई जगह शिवमहापुराण व विष्णु पुराण कथा भी आयोजित होनी हैं।
वर्षा ऋतु की शुरुआत-
हिंदू पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ माह के नाम से जाना जाता है। आषाढ़ माह भगवान विष्णु,भोलेनाथ, सूर्य देव व देवी को समर्पित है। आषाढ़ माह से ही वर्षा ऋतु की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। कृषि के लिए ये मास बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आषाढ़ कामना पूर्ति महीना कहलाता है। इस माह में किए गए तीर्थ, प्रार्थनाएं, जप, तप, साधना सिद्ध हो जाते है। आषाढ़ माह में ही गुरु पूर्णिमा, देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ यात्रा जैसे बड़े व्रत-त्योहार आते हैं।आषाढ़ माह में वातावरण में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है ।यही वजह है कि इस महीने में यज्ञ या हवन करने से हानिकारक कीट, पतंगों का भी नाश होता है।
Published on:
07 Jun 2023 11:54 am
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